वाराणसी में हुई भव्य सजावट।
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प्रकाशपर्व दीपावली का पूजन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि में प्रदोष काल स्थिर लग्न में किया जाएगा। भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और कुबेर का पूजन विधि-विधान से होगा।
काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री पं. दीपक मालवीय ने बताया कि महालक्ष्मी पूजन के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त स्थिर कुंभ लग्न दिन में 1:14 से 2:46, स्थिर वृष लग्न में शाम को 5:52 से 7:49 तक है। इसके पश्चात महानिशा में स्थिर सिंह लग्न रात्रि 12:20 से 2:36 बजे तक है।
सिगरा स्टेडियम में दीप प्रज्ज्वलित करतीं युवतियां।
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दीवाली की पूर्व संध्या पर खिलाड़ियों ने बुधवार को सिगरा के डॉ. संपूर्णानंद स्पोर्ट्स स्टेडियम को दीपों से सजाया। फुटबाल, हॉकी, वालीबाल, एथलेटिक्स, जूडो सहित कई खेलो के खिलाड़ियों ने लाखों दीपों से जलाएं। उधर खेलो बनारस और चोलापुर में हुई जिला स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता में जीत का खिलाड़ियों ने शिवपुर स्थित एपीएस एकेडमी के कबड्डी ग्राउंड को दीपों से सजाकर जीत का जश्न मनाया।
सुरसरि का तट दीपों की जगमग से रौशन हो उठा। दीपकों की कतार से दशाश्वमेध घाट और मंदिर आलोकित हुए। बुधवार की शाम को गंगा सेवा निधि की ओर से गंगा के तट पर 1001 दीप जलाकर दीपोत्सव मनाया गया। गंगा आरती में दीये से शुभ दीपावली लिखकर देशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दी गईं।
श्रीराम की जन्मस्थली अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत के साथ ही गंगा के घाट भी दीपकों की माला से जगमगा उठे। गंगा सेवा निधि के सुशांत मिश्रा ने बताया कि गंगा सेवा निधि हर वर्ष दीपोत्सव पर दशाश्वमेध घाट को 1001 दीयों से जगमग करता है। संस्था के सदस्यों ने शाम पांच बजे से दीयों को घाट पर सजाना शुरू किया और उन्हें सूरज ढलने के साथ ही जला दिया।