वाराणसी। कहीं बाजेगाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई तो कहीं भजनों की गूंज के बीच गोपियों के महारास पर लोग झूम उठे। नृत्य-गायन की मोहक प्रस्तुतियों के साथ शुक्रवार को काशी में कृष्ण जन्मोत्सव का आगाज हो गया। फूलों, हरी पत्तियों के अलावा रंग-बिरंगी लतरों से कृष्ण दरबार की झांकियां सजा दी गई हैं।
गुरुधाम से लगे इस्कॉन मंदिर में जन्माष्टमी उत्सव शुक्रवार की शाम शुरू हो गया। कृष्ण की लीलाओं पर आधारित प्रसंगों पर महारास की प्रस्तुति के साथ ही भजनों के बोल पर लोग थिरकते रहे। सोज ग्रुप आफ इंटरटेनमेंट के कलाकारों ने ‘कालिया मर्दन’ के बाद ‘महारास’ लीला प्रस्तुत की। वृष्टि चक्रवर्ती राधा रूप में और सागर विश्वकर्मा कृष्ण की भूमिका में थे। इसमें विश्वनाथ शर्मा, निधि सिंह, विशाल
सिंह, श्रद्धा चटर्जी, अर्जुन झा, जागृति राय, अमन पांडेय, सुपर्णा राय ने अभिनय किया। स्वर दिया रोली दीक्षित और कुमार अभिषेक ने। संचालन सोज ग्रुप की निदेशक हर्षिता पाठक ने किया। इसके बाद इस्कॉन मंदिर के प्रबंधक अधोक्षज दास ने कलाकारों को सम्मानित किया। उधर, धर्मसंघ में भी कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव की धूम रही। पीठाधीश्वर शंकरदेव चैतन्य ब्रह्मचारी की
आध्यात्मिक परिचर्चा के बाद संगीत प्रस्तुति हुई। भोजपुरी के कलाकार व्यास मौर्य ने भजन के अलावा कजरी, सोहर और अन्य पारंपरिक गीतों से फिजा बदल दी। तबले पर दीपक सिंह, बैंजो पर पप्पू, ढोलक पर भोला तिवारी ने संगत की। धर्मसंघ के महामंत्री जगजीतन पांडेय ने कृष्ण की लीलाओं को लोक मंगलकारी बताया। वहीं, हरे कृष्ण हरे राम संकीर्तन सोसाइटी की ओर से सुबह सात बजे
अन्नपूर्णानगर से बाजेगाजे के साथ लड्डू गोपाल की शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान भगवान कृष्ण के भजनों पर भक्त झूमते रहे। इसमें वीणापाणि शिक्षा निकेतन केएल मेमोरियल और आरएनवीएन कान्वेंट स्कूल के बच्चों ने इसमें हिस्सा लिया। महमूरगंज स्थित माहेश्वरी भवन में भगवान कृष्ण के विग्रह को प्रतिष्ठापित किया गया। यहां तीन दिन उत्सव चलेगा।