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गिरिजा देवी ने होरी-ठुमरी से सजाई शाम

Wed, 18 Feb 2015 02:14 AM IST
वाराण्ासी, ब्यूरो
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वाराणसी। काशी में संगीत का मिलाप नहीं होता तो शिव का डमरू भी नहीं बजता। इसीलिए शिव विवाह के पर्व महाशिवरात्रि पर गिरिजा सुर सजाने के लिए पहुंचीं तो तालियों की बौछार शुरू हो गई।
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ठुमरी गायिका गिरजा देवी ने होरी की बंदिशों से संगीत निशा को संवारा तो पं. तरुण भट्टाचार्य ने संतूर के तारों पर स्वरों की खनक से चार चांद लगाया। शिवरात्रि संगीत महोत्सव की दूसरी निशा सुर-ताल के महारथियों के नाम रही।
दुर्गाकुंड स्थित हनुमान प्रसाद पोद्दार अंध विद्यालय परिसर में शाम सात बजे शुरुआत हुई। 13 वर्षीया सानिका तुलस्यान ने भरतनाट्यम नृत्य की प्रस्तुति की। भगवान गणेश -कार्तिकेय की पुष्पांजलि में थिरकन से उन्होंने आराधना की। पार्वती शृंगार को भी नृत्य के भावों में व्यक्त किया।
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इनके बाद पं. तरुण भट्टाचार्य ने संतूर पर राग रागेश्वरी की अवतारणा की। अलाप, जोड़ के बाद उन्होंने झप ताल में 10 मात्रा में निबद्ध बंदिश बजाई। इसके बाद तीन ताल में द्रुग गत बजाया। संतूर और तबले के बीचसवाल-जलाब से भी उन्होंने संगीत प्रेमियों का ध्यान खींचा।तबले पर ललित कुमार ने संगत की।
 इनके बाद ठुमरी गायिका गिरिजा देवी ने मंच संभाला। जय जय हो शिव परम पराक्रम ... के बोल पर शिव स्तुति से उन्होंने शुरुआत की। इसके बाद राग पूरिया कल्याण में बंदिश पर आलापचारी की। ठुमरी के बाद उन्होंने भगवान शिव पर आधारित होरी भी पेश किया।
तबले पर गोपाल मिश्र, हारमोनियम धर्मनाथ मिश्र, सारंगी पर संतोष मिश्र ने संगत की। गायन में रीता पाल और श्रावणी ने सहयोग किया। संचालन किया हरि राम द्विवेदी ने। यह कार्यक्रम सेठ किशोरी लाल जालान सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित है। 
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