महामना के सपने को साकार करने के उद्देश्य से बीएचयू आईएमएस को एम्स जैसा बनाने की इस पहल अनुबंध की औपचारिकता पूरी होने के बाद शुरू हो गई है। मानव संसाधन मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के सहयोग से इस सुविधा को लेकर जो एक्शन प्लान तैयार किया गया है, उस पर अगर गौर करें तो आईएमएस की सूरत ही बदल जाएगी।
यहां केवल चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ, नर्स, सुविधाएं ही नहीं बढ़ेंगी बल्कि कई ऐसे ग्रांट भी बढ़ेंगे जो एम्स की तुलना में आधे से भी बहुत कम हैं। इसके अलावा गुणवत्तायुक्त शिक्षा, रिसर्च-इनोवेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। जिसका तात्कालिक लाभ यहां छात्रों, शिक्षकों को मिलेगा लेकिन सबसे अधिक लाभ इलाज कराने वाले मरीजों को मिलेगा।
बीएचयू के साथ ही आईएमएस के लिए चार अगस्त का दिन ऐतिहासिक हो गया। संस्थान के खुलने के बाद उपलब्ध संसाधनों में अब तक तो किसी तरह काम चला लेकिन जिस तरह का प्लान तैयार किया गया है और कमियां खोजकर बाहर निकाली गई, उसके पूरा होते ही यह संस्थान और भी संस्थानों के लिए मिसाल बन जाएगी।
इसमें 27 नए विभाग खुलने, जांच के उपकरण आने, भर्तियों, बेड बढ़ाने आदि को लेकर तीन साल का एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके अलावा सात साल का स्ट्रेटजिक प्लान और 15 साल का विजन प्लान बनाया गया है। इसके आधार पर ही शिक्षा और शोध का खाका तैयार होगा।
शोध और इनोवेशन के बारे में समय-समय पर वीडियो, टेली कांफ्रेंसिंग, एम्स में अत्याधुनिक सुविधाओं के बारे में भी अदान-प्रदान होता रहेगा। वर्तमान में एम्स की तुलना में आईएमएस में उपलब्ध संसाधनों पर नजर डाला जाए तो बहुत कम है। जैसे-तैसे काम चल रहा था और यही वजह है कि यहां बेड, चिकित्सक, धनराशि आदि की कमी से मरीजों को जूझना पड़ता है।