रिमोट हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए वायरलेस बॉडी एरिया नेटवर्क की मदद से फॉग कंप्यूटिंग सिस्टम तैयार किया गया है। 4 जनवरी 2023 को पेटेंट टाइल किया गया था, अप्रूवल 6 जनवरी 2025 को मिला। 11 जनवरी को 2023 को बायो डिग्रेडेबल बांस का ड्रिकिंग स्ट्रॉ और उसे बनाने की तकनीक को लेकर पेटेंट फाइल किया गया था। बांस से स्ट्रॉ बनाया जाएगा। ट्रैफिक लाइट की पहचान के लिए चौकस इनकोडर-डीकोडर बेस्ड सिस्टम पर 14 जनवरी को दो साल के बाद पेटेंट मिला। इसे 14 दिसंबर 2022 को फाइल किया गया था।
5 सितंबर 2022 को पॉली-विन्यलडिन फ्लूरॉईड और हाईड्रेटेड एंटीमनी पेंटोऑक्साईड आधारित नैनो कंपोजिट फिल्म बेस्ड कैपेटिव एनर्जी स्टोरेज डिवाइस बनाने के लिए पेटेंट फाइल किया गया था। स्वीकृति 8 जनवरी को मिली। पॉलिमर पार्टिकल कंपोजिट रेडिएटिव कूलिंग कोटिंग के लिए 24 जनवरी को पेटेंट मिला है, जबकि आवेदन 4 जनवरी 2023 को किया गया था। कोपॉलिमेरिक फॉर्मूलेशन और इसे बनाने की तकनीक को लेकर 27 जनवरी को पेटेंट मिला, जबकि 3 जुलाई 2023 को फाइल किया गया था।
जनवरी में ही 16 प्रोजेक्ट मिले हैं। इसमें सबसे ज्यादा इसरो के सात, आईसीएमआर के तीन, डीआरडीओ के दो और एनएमसीजी, सीजीआरवीवीएनएल, मीट, जीएमडीसी के 1-1 प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। सबसे ज्यादा फंड 4 करोड़ 35 लाख रुपये एनएमसीजी के प्रोजेक्ट को मिला है। इसमें वाटर रिसोर्स मैनेजमेंट के लिए डिसिजन सपोर्ट सिस्टम तैयार करना है। इसके बाद शहरी स्माई सॉल्यूशन प्रोग्राम और केमिकल प्लांट के लिए डिजिटल ट्विन तैयार कराने के लिए 1 करोड़ 10 लाख रुपये मिले हैं। बाकी प्रोजेक्ट को डेढ़ लाख से लेकर 97 लाख तक फंड मिले हैं।