केमिकल इंजीनियरिंग और सिरेमिक इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए किसी भी स्पेशलाइजेशन की जरूरत नहीं है। आठ विषयों में स्पेशलाइजेशन चाहिए। पांच इंटर डिसीप्लीनेरी कोर्स के तहत प्रवेश लिया जा रहा है। इसमें भी कोई स्पेशलाइजेशन की मांग नहीं की गई है। सबसे ज्यादा 74 सीटों पर सिविल इंजीनियरिंग विभाग में प्रवेश दिया जा रहा है। सात तरह की स्पेशलाइजेशन की मांग की गई है।
हाइड्रॉलिक्स एंड वाटर रिसोर्स इंजीनयिरिंग, जियो केमिकल, स्ट्रक्चरल, एनवार्यंमेंट, ट्रांसपोर्टेशन, जियो इंफॉर्मेटिक्स और इंजीनियरिंग जियो साइंस से बीटेक होना चाहिए। यदि बीटेक के बजाय जियोलॉजी से बीएससी किया हो तो गेट क्वालिफाइड जरूरी है। इलेक्ट्रॉनिक्स में पांच, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में चार और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में तीन तरह के स्पेशलाइजेशन रखे गए हैं।
बीएचयू में जल शक्ति मंत्रालय की ओर से भूजल संसाधनों का संवहनीय विकास और प्रबंधन विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। 146 छात्र और छात्राओं को जलवायु परिवर्तन और ग्राउंड वाटर के संबंधों को बताया गया। वीडियो से बच्चों को बोरवेल या ट्यूबवेल में गिरने से बचाने की तकनीक सिखाई गई। आईआईटी बीएचयू के सिविल इंजीनियरों ने पीपीटी से भूजल गुणवत्ता और फील्ड में पानी की मौजूदगी के बारे में छात्रों को समझाया गया।