आईआईटी बीएचयू में अब पीएचडी थीसिस का सारांश (एब्सट्रैक्ट) हिंदी में भी प्रस्तुत किया जा सकेगा। ऐसी व्यवस्था लाने वाला आईआईटी बीएचयू का देश पहला तकनीकी संस्थान बन गया है। छात्रों को विकल्प दिया गया है कि वे चाहें तो हिंदी या इंग्लिश दोनों में से किसी भी भाषा में अपने शोध का सारांश प्रस्तुत कर सकते हैं। ये व्यवस्था इसी सत्र से लागू हो गई है।
आईआईटी बीएचयू के कई विभागों के पीएचडी धारकों ने हिंदी में शोध सार लिखने में रुचि दिखाई है। इंजीनियरिंग और तकनीक की भाषा इंग्लिश ही होती है, ये अनिवार्यता अब नहीं होगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इंग्लिश के साथ हिंदी में भी किसी रिसर्च का सार प्रस्तुत करने की बात कही गई है। ऐसे में आईआईटी बीएचयू ने देश में इसकी पहल की है। वहीं, आईआईटी बीएचयू एकमात्र ऐसा संस्थान भी है जहां पर कार्यालय का 80 फीसदी काम हिंदी में किया जा रहा है।
सितंबर 2024 में आईआईटी बीएचयू के डायरेक्टर प्रो. अमित पात्रा के निर्देशन में हुई सीनेट की बैठक में राजभाषा प्रकोष्ठ के इस प्रस्ताव को पारित किया गया था। सभी सदस्यों ने इस पर पूर्ण सहमति जताई और अब विभागों को भी सर्कुलर जारी कर दिया गया है। पत्र में इसका उल्लेख किया गया है कि जो छात्र हिंदी में सारांश लिखने के इच्छुक हों, वे आगे आ सकते हैं।