यह चिप पार्किंसन, अवसाद और यहां तक कि सिजोफ्रेनिया जैसी बीमारियों की आशंका का पता लगाकर जान बचा सकता है। शोधार्थी उम्मियॉ कमर ने बताया कि जब डोपामाइन का स्तर बहुत अधिक होता है, तो यह मानव शरीर के आवेग नियंत्रण में बाधा उत्पन्न कर सकता है, जिससे कभी-कभी आक्रामक व्यवहार हो सकता है। हंटिंगटन की बीमारी, जो तंत्रिका कोशिकाओं को धीरे-धीरे टूटने का कारण बनती है, जिससे हाइपरकाइनेटिक/अनियंत्रित गतिविधियां होती हैं, मानव शरीर में अत्यधिक डोपामाइन का परिणाम है।
कम डोपामाइन से थकान और सुस्ती
दूसरी ओर अगर डोपामाइन ज्यादा नीचे चला जाता है तो व्यक्ति को प्रेरणा की कमी, थकान और सुस्ती महसूस होती है, जिससे गंभीर अवसाद होता है। न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह आविष्कार उपयोगी हो सकता है। यह न केवल न्यूरोट्रांसमीटर सेंसिंग के बारे में हमारी समझ बढ़ाता है, बल्कि उपचार की रणनीति को बदलने और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से पीड़ित लोगों का जीवन बेहतर बनाने की क्षमता भी रखता है।