भीमचंडी की राह नहीं आसान
कंदवा से भीमचंडी जाने वाली सड़क भी बदहाल है। रास्ते पर कई जगह गिट्टियां बिखरी हुई हैं तो कई जगह गड्ढे हैं। रात में यहां से निकलने पर श्रद्धालुओं के चोटिल होने की आशंका है। धर्मशालाओं की हालत भी दुरुस्त नहीं है।
बंद कर दिया पुराना मार्ग, टूटेगी परंपरा
राजातालाब में ओवरब्रिज निर्माण कार्य लंबित होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी होगी। पंचक्रोशी मार्ग किनारे नाला निर्माण हो रहा है, जिससे वहां गड्ढा है। मिट्टी का ढेर सड़क पर लगा है। लिहाजा, पुराने रास्ते को बंद कर दिया गया है। इसे लेकर श्रद्धालुओं में रोष है। उनका कहना है कि पुराना मार्ग बंद किए जाने से परंपरा खंडित होगी।
राजातालाब के निवासी चंदन मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट के कृष्णा जायसवाल, पप्पू विश्वकर्मा, राजू विश्वकर्मा, रामराज केसरी, चंद्रशेखर आदि ने उपजिलाधिकारी राजातालाब को पत्र देकर सड़क दुरुस्त कराने की मांग की है।
कपिलधारा पंचकोशी मार्ग पर शौचालय में गंदगी और लगा ताला
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पांचों पंडवा में सबसे ज्यादा मुश्किल
चौथे पड़ाव शिवपुर में श्रद्धालुओं को सबसे अधिक मुश्किल झेलनी होगी। हरहुआ से शिवपुर जाने वाले मार्ग को जगह-जगह खोदकर छोड़ दिया गया है। कहीं नाले का पानी बह रहा है तो कहीं गड्ढा है। सड़क के बीचोंबीच सीवर का ढक्कन पड़ा है। राह में पड़ने वाले छोटे-छोटे मंदिरों के आगे भी गड्ढे खोद दिए गए हैं। स्थानीय लोगों इन्हें भरने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रभु श्रीराम ने भी की थी परिक्रमा
मणिकर्णिका घाट से आरंभ होने वाली 25 कोस की पंचक्रोशी यात्रा यह यात्रा भीमचंडी, रामेश्वर, पांचों पंडवा और कपिल धारा से होते हुए वापस मणिकर्णिका घाट पहुंचकर विराम लेगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने भी पंचक्रोशी यात्रा की थी। गंगा स्नान करने के बाद विशेश्वर महादेव के दर्शन-पूजन और संकल्प के साथ श्रद्धालु यात्रा पर निकलते हैं। यात्रा के दौरान वह 108 तीर्थ स्थलों और मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं।