सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन कुंडों व तालाबों में कराकर दुनिया को गंगा निर्मलीकरण का संदेश दिया गया। मंगलवार-बुधवार को जिले में चिह्नित कुंडों और सरकारी गंगा सरोवरों में रात आठ बजे तक 350 से अधिक पूजा पंडालों की देवी प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
शहरी क्षेत्र के 256 में 153 पूजा पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार रात आठ बजे तक हो चुका था। ग्रामीण इलाकों की 222 में से 197 प्रतिमाएं विसर्जित हुई थीं। दशहरा के दिन मंगलवार को दोपहर बाद से ही देवी प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गया। सामने घाट के पास विश्व सुंदरी पुल के नीचे बने गंगा सरोवर में सबसे पहले रोहनिया की दो प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।
इधर, खिड़किया घाट पर बने गंगा सरोवर में पहली प्रतिमा टीपू विश्वकर्मा स्पोर्टिंग क्लब शैलपुत्री की विसर्जित की गई। मंगलवार को यहां 12 पंडालों की प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। लक्सा स्थित लक्ष्मीकुंड, मैदागिन स्थित कंपनी बाग पोखरे में भी प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ। बुधवार देर रात तक लक्ष्मी कुंड में 17 प्रतिमाएं विसर्जित की गईं।