रॉबर्ट्सगंज जैन साधना भवन में पर्युषण पर्व पर शामिल लोग। स्रोत स्वयं
सोनभद्र। जैन धर्म के नौ दिवसीय प्रर्यूषण पर्व का समापन बृहस्पतिवार को जैन भवन में हुआ। इस दौरान लोगों ने मिच्छामी दुक्कड़म बोलकर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगी। दिल्ली से आए श्रावक सुनील ने बताया कि पर्व के अंतिम दिन संवत्सरी मनाई जाती है, जिसे जैन संवत्सर भी कहा जाता है।
इसी दिन जैन समाज के लोग मिच्छामी दुक्कड़म बोलकर सभी जीवों से क्षमा मांगते हैं और क्षमा करते हैं। इस मौके पर प्रतिक्रमण तपस्या की गई, जिसमें पूरे वर्ष के पापों से क्षमा मांगी गई। उन्होंने कहा कि महावीर स्वामी का मूल सिद्धांत अहिंसा परमो धर्म: जीवन जीने की सच्ची राह सिखाता है।
इस दौरान विशेष तप, उपवास और साधना करने वालों को सम्मानित किया गया। अंत में मंगल पाठ और प्रसाद वितरण हुआ। कार्यक्रम में धर्मराज जैन, हर्ष अग्रवाल, सुबोध अग्रवाल, रामेश्वर जैन, पवन कुमार जैन, मनोज जैन, देवराज जैन, जोगीराम जैन, सुमित जैन, सोनू जैन, पवन जैन, विजय जैन आदि थे।