रॉबर्ट्सगंज में अमर उजाला की ओर से संवाद में शामिल प्रधानाचार्य। संवाद
सोनभद्र। बच्चों की शिक्षा और उनके उज्ज्वल भविष्य को लेकर अभिभावकों और शिक्षकों को मिलकर काम करना होगा। सिर्फ स्कूल के भरोसे उन्हें छोड़ना ठीक नहीं है। वहां बच्चा छह घंटा रहता है, जबकि घर में 18 घंटे बिताता है।
ऐसे में अभिभावकों बच्चों के व्यवहार और गतिविधियों पर निगरानी रखें। उन्हें मोबाइल सीमित समय के लिए ही दिया जाए। यह बातें अमर उजाला की ओर से बृहस्पतिवार को आयोजित संवाद में शिक्षकों ने कहीं।
संवाद में अमर उजाला ओलंपियाड की भी सराहना की। शिक्षकों ने कहा कि यह प्रतियोगिता बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना जगाने का सर्वोत्तम मंच है। हर बच्चा इसमें भाग लेकर अपनी प्रतिभा साबित कर सकता है।
दिल्ली पब्लिक सीनियर सेक्रेंड्री स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. आलोक सिंह ने कहा कि अभिभावक बच्चों को समय नहीं दे रहे। पूरी जिम्मेदारी सिर्फ स्कूल के भरोसे छोड़ दी गई है। उन्हें भी बच्चों की गतिविधियों पर निगरानी रखनी होगी। पैरेंटिंग एप इसमें मददगार हो सकता है। श्रीएकेडमी के प्रिंसिपल जीएन गोस्वामी ने कहा कि अगर शिक्षक किसी बच्चे पर हाथ भी उठा दे तो परिजन तुरंत स्कूल पहुंच जाते हैं, जिससे शिक्षण कार्य और कठिन हो गया है।
हर स्कूल चाहता है कि उनके यहां पढ़ने वाले बच्चे समाज में अलग पहचान बनाएं। यह तभी होगा, जब अभिभावकों का भी बराबर सहयोग मिलेगा।
एमवीएम स्कूल के प्रधानाचार्य सत्यदेव श्रीवास्तव ने कहा कि अब बच्चों को पढ़ाने के लिए उनके पीछे लगना पड़ रहा है। मोबाइल सीमित समय के लिए ही दिया जाना चाहिए। सनबीम स्कूल के मुकेश कुमार ने कहा कि बच्चों की गलतियों को छिपाया न जाए, बल्कि उसे सामने लाकर उसका अंजाम बताया जाए। जयपुरिया स्कूल के विपिन मिश्र ने भी बच्चों के व्यक्तित्व विकास के लिए अभिभावकों के सहयोग की जरूरत बताई।