केस-1
बच्चों की जिम्मेदारी पूरी हुई तो अब मानसिक शांति के लिए तलाक
भोजूबीर क्षेत्र में रहने वाले एक दंपती जिनकी 67 साल है, उनके बच्चे पढ़ाई और नौकरी के बाद अलग रहने लगे। इसके बाद पति-पत्नी के बीच पहले से चले आ रहे मतभेद खुलकर सामने आने लगे। पत्नी का कहना था कि बच्चों की परवरिश और परिवार की जिम्मेदारियों में जीवन निकल गया, अब वह मानसिक शांति के साथ रहना चाहती हैं। पति-पत्नी दोनों आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं। इसी वजह से अलग रहने की मांग लेकर मामला अदालत तक पहुंचा।
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केस-3
घरेलू सहायिका से संबंध का आरोप
जैतपुरा क्षेत्र की एक कॉलोनी में रहने वाले 78 वर्षीय बुजुर्ग दंपती का विवाद घरेलू सहायिका से जुड़े संबंध को लेकर अदालत तक पहुंचा। पत्नी ने काउंसिलिंग के दौरान पति पर लंबे समय से घरेलू सहायिका के साथ नजदीकी संबंध होने का आरोप लगाया। पति-पत्नी के बीच इस मुद्दे को लेकर विवाद लगातार बढ़ता गया। बच्चे बड़े होकर अलग रहने लगे तो दोनों के बीच सुलह कराने वाले परिवार का दबाव भी कम हो गया। अब पत्नी अलग रहने की इच्छा जता रही है।
विशेषज्ञ बोले
वर्तमान समय में लोग स्वतंत्र हो गए हैं और कोई भी अपने जीवन में दूसरों का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करना चाहता। मनमुटाव होने पर सुलह की कोशिश करने के बजाय लोग अहंकार पाल लेते हैं। अब समाज में तलाक को बुरी नजर से नहीं देखा जाता, जबकि पहले सामाजिक भय के कारण तलाक के मामले कम होते थे। अब चाहे उम्र अधिक हो या लोग मध्य आयु में हों, वे किसी की टोका-टाकी बर्दाश्त करने की क्षमता खोते जा रहे हैं। - प्रो. संजय गुप्ता, डीन, मनोचिकित्सा विभाग, आईएमएस बीएचयू