गंगा, गोमती और नाद नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण कई गांवों के लोग घर-बार छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। जान बचाने के लिए लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर जाकर शरणार्थी की तरह जीवन जी रहे हैं। खेती और गृहस्थी चौपट होने के बाद बाढ़ पीड़ित अब दाना-पानी तक को तरस रहे हैं। इससे भी बड़ा संकट मवेशियों के चारे का है। वहीं, जिला प्रशासन की उपेक्षा के कारण राहत शिविरों में भी इन्हें कोई राहत नहीं मिल रही।
घर छोड़ सुरक्षित स्थानों पर डाला डेरा
दानगंज। क्षेत्र के दर्जन भर से अधिक गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। पिपरी गांव तो टापू बन चुका है। पिपरी और रौना समेत कई गांवों के करीब 200 लोगों ने घर छोड़कर सुरक्षित जगहों पर जाकर लंगर डाला है। नियारडीह और अजगरा प्राथमिक पाठशाला पर बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं लेकिन यहां पीड़ितों के खाने-पीने का कोई इंतजाम नहीं है। कई बच्चे-बढ़े बीमार हैं, जिन्हें दवाइयां और दूध तक नहीं मिल पा रहा।
छितौना में फंसे लोगों को नाव तक नहीं
चिरईगांव। बाढ़ से प्रभावित ढाब क्षेत्र के दो दर्जन से गांवों के लोगों के लिए प्रशासन राहत के कोई इंतजाम नहीं कर सकता। बिजली कटने से रात को अंधेरे में जीने को मजबूर इन गांवों के लोग खाना-पानी के साथ ही माचिस, मोमबत्ती और बच्चों के दूध तक के लिए लोग तरस रहे हैं। बाढ़ में फंसे छितौनी गांव के लोगों को प्रशासन नाव तक नहीं मुहैया करा सकता। इस गांव के ओमप्रकाश की भैंस बाढ़ के बह गई है। लोग लगातार प्रशासन से नाव उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं ताकि सुरक्षित स्थानों पर जा सकें लेकिन लेखपाल और कानूनगो आश्वासन देकर चले जाते हैं।
खेत-खलिहान से घरों तक पानी
चोलापुर। क्षेत्र के दर्जनों गांव में खेत-खलिहान से लेकर घरों तक पानी घुस गया है। बेला, धर्मपुर, रौना कला, रौना खुर्द आदि गांव में बाढ़ से हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। पशुओं के चारे पानी की समस्या जटिल हो गई है । रौना कला के दलित बस्ती के लोग गांव छोड़ रौना खुर्द में जाकर अस्थाई रूप से बसे हुए हैं। प्रशासन का कोई नुमाइंदा न पहुंचने से बाढ़ पीड़ितों में रोष व्याप्त है।
बाढ़ से घिरे पिपरी गांव में बढ़ संकट
चौबेपुर। हफ्ते भर से नाद और गोमती के बाढ़ से घिरे पिपरी गांव में लोगों के समक्ष संकट बढ़ता जा रहा है। घरों में कैद ग्रामीणों को प्रशासन से अभी तक कोई मदद नहीं मिली। लोगों के घरों में खाने-पीने का सामान भी खत्म हो चुका है। इस गांव के बहुत से लोगों ने हरिहरपुर और मठिया गांव में शरण ले रखी है। पिपरी से मठिया के बीच दो सरकारी नावें चलाई जा रही हैं लेकिन हरिहरपुर के लिए कोई नाव मुहैया नहीं कराई गई। हालांकि अब मठिया में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। अजांव, बर्थरा खुर्द, गरथौली, भगवानपुर, कुर्सिया, हरिहरपुर, धौरहरा और राजवारी आदि गांवों में भी फसलें जलमग्न हैं। सोमवार को एसडीएम सदर आर्यका अखौरी ने पिपरी गांव में पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की। वहीं, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता लालजी सोनकर ने समर्थकों बाढ प्रभावित गांवो का दौरा किया। पिपरी गांव में उन्होंने 10 जनरेटर, पानी और लंच पैकेट उपलब्ध करवाए।
कई गांवों में पानी घुसने से लोग सहमें
रोहनिया। क्षेत्र के बेटावर, मुड़ादेव, माधोपुर, करसड़ा और बच्छांव समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से लोग सहम गए हैं। लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं। स्कूलों में पानी भर जाने से पठन-पाठन ठप हो गया है। वहीं, रमना डंपिंग क्षेत्र में पानी भर जाने से कूड़ा बजबजा रहा है, जिससे क्षेत्र में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। सोमवार को बसपा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य उदय नारायण सिंह पटेल, ग्राम प्रधान बचाऊ पटेल, राजबिहारी, पंचम पटेल, रामसनेही, परमानंद आदि में बेटावर, मुड़ादेव और करसड़ा पहुंचकर बाढ़ पीड़ितों में राहत सामाग्री वितरित की। वहीं, एसडीएम राजातालाब त्रिभुवन राम ने शंहशापुर, जक्खिनी, मरुई, पच्राई, जमुनी, तिलंगा, सिहोरवा, बेलवा आदि गांवों का दौरा कर नुकसान का आंकलन किया। उन्होंने बताया कि राजकीय इंटर कालेज जक्खिनी और ऋषि नारायण इंटर कालेज जमुनी में राहत शिविर खोला गया है।
खैरा जक्खिनी मार्ग का संपर्क भंग
आराजी लाइन। गंगा में उफान के कारण शांहशाहपुर, सिहौरवा, बेलवा और जक्खिनी के बाद कई अन्य गांवों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। उधर, जक्खिनी-खैरा मार्ग पर पानी भर जाने से आवागमन बाधित हो गया है।