गंगा की बाढ़ कहर बरपाने लगी है। शहर के दक्षिणी इलाके में सोमवार को गंगा की लहरों के नगवा चुंगी तक पहुंचने के बाद तीन दर्जन से अधिक कॉलोनियों का संपर्क शहर से टूट गया। इधर, दशाश्वमेध में पर्यटकों से गुलजार रहने वाली गलियों में पानी भरने से कई मुहल्लों की आवाजाही प्रभावित हो गई। हरिश्चंद्र घाट तिराहे तक गंगा की लहरों के बढ़ने से लकड़ी के टॉल के साथ ही तौल-कांटा सड़क पर लगा दिए गए।
अस्सी-नगवा मार्ग के अलावा लंका-संकटमोचन मार्ग पर भी पानी आने से पैदल चलने वाल को दिक्कत हो रही है। नगवा से मलहिया के बीच चार सौ से अधिक लोगों को नावों के सहारे निकाला गया। बाढ़ राहत शिविरों में शरणार्थियों की भीड़ बढ़ गई है। उधर, सामान बर्बाद होने या चोरी होने के डर से जिला प्रशासन की अपील के बाद भी हजारों लोग अभी छतों पर रहकर गंगा की रफ्तार थमने का इंतजार कर रहे हैं। गंगा के गलियों में घुसने से बंगाली टोला गली में पर्यटकों, श्रद्धालुओं की आवाजाही पर असर पड़ गया है। बंगाली टोला गली से हजारों की तादाद में दक्षिण भारतीय श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ, अन्नपूर्णा और विशालाक्षी माता के दरबार में हाजिरी लगाने जाते हैं लेकिन गली में पानी भर गया है।
दशाश्वमेध घाट से ऊपर साइकिल स्टैंड परिसर में रात को बाढ़ फैलने लगी। दशाश्वमेध सब्जी मंडी में पानी भरने से सौ से अधिक सब्जी की दुकानें भी हटा ली गईं। बाजार बंद हो गया है। उधर, अस्सी, नगवा, गंगोत्री बिहार, सत्यम नगर, केदारनगर, महेश नगर, जानकी नगर, मारुति नगर, सुखानंद आश्रम, मलहिया, मदरवा, रमना में सड़कों, गलियों में कमर से कंधे के बीच पानी आने से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का निकलना मुश्किल हो गया है।