Varanasi: कुलपति ने बीए एलएलबी के ऑनर्स और इंटिग्रेटेड कोर्स का मूल्यांकन करने के लिए एक समिति का गठन कर छात्रों को आश्वस्त किया कि उनका अहित नहीं होने दिया जाएगा। काशी विद्यापीठ की कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय ने कहा कि बीए एलएलबी के 2019-24 बैच के छात्र-छात्राओं को पंचवर्षीय इंटिग्रेटेड कोर्स की डिग्री दी जाएगी।
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पांच वर्षीय (2019-24) बीए एलएलबी पाठ्यक्रम में प्रवेश को लेकर गड़बड़ी का मामला सामने आया है। शुरुआत में कोर्स को बीए एलएलबी (ऑनर्स) बताकर दाखिला ले लिया गया। दो वर्ष तक अंकपत्र भी ऑनर्स के जारी किए गए, लेकिन बाद में छात्र-छात्राओं को बताया गया कि यह कोर्स ऑनर्स नहीं इंटिग्रेटेड है।
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छात्र-छात्राओं का कहना था कि उन्होंने फीस ऑनर्स कोर्स की जमा की है और पढ़ाई इंटिग्रेटेड की कर रहे हैं। छात्रों की शिकायत पर कुलपति ने बीए एलएलबी (ऑनर्स) और इंटिग्रेटेड कोर्स की फीस की जांच के लिए कमेटी बनाई है। बीए एलएलबी के सत्र 2019-24 से पूर्व काशी विद्यापीठ ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) में बीए एलएलबी के ऑनर्स पाठ्यक्रम की मान्यता के लिए आवेदन किया था।
मान्यता से जुड़े लिखित निर्देश आने से पहले किसी से टेलीफोनिक वार्ता में विश्वविद्यालय के पास ऑनर्स की मान्यता मिलने की सूचना आ गई। इससे उत्साहित विश्वविद्यालय ने बीए एलएलबी के 2019-24 पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए जो विज्ञापन निकाला, उसमें बीए एलएलबी पाठ्यक्रम को ऑनर्स कोर्स दर्शाया गया। इस आधार पर लगभग 60 सीटों पर दाखिला लिया गया।
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बाद में जब बीसीआई से पत्र आया तो उसमें बीए एलएलबी की मान्यता इंटिग्रेटेड कोर्स की थी। मगर, इस पर खास ध्यान नहीं दिया गया। यही नहीं छात्र-छात्राओं को चार सेमेस्टर तक ऑनर्स का अंकपत्र भी जारी कर दिया गया।
बाद में कुलपति प्रो. आनंद त्यागी के संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने कहा कि बीए एलएलबी कोर्स का एफिलिएशन इंटिग्रेटेड है, ऑनर्स नहीं। ऐसे में ऑनर्स की डिग्री नहीं दी जा सकती। यह जानकारी मिलने पर छात्र-छात्रा भड़क गए। उन्होंने कुलपति से मुलाकात कर आपत्ति जताई। कहा कि उन्हें इतने समय बाद बताया गया और ऑनर्स कोर्स के नाम पर शुल्क भी ज्यादा लिया गया।
बोले अधिकारी
किसी पाठ्यक्रम की प्रकृति ऐसे नहीं बदलती। उस समय उत्साह में विज्ञापन जारी करने में चूक हुई है। हालांकि विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी इच्छा के मुताबिक उन्हें आश्वस्त कर दिया गया है। विद्यार्थियों का किसी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। - प्रो. एके त्यागी, कुलपति, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ