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UP: मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है तर्कहीन और अंधाधुंध गिरफ्तारियां, गो हत्या के मामले में आरोपी को मिली जमानत

Thu, 20 Jun 2024 11:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

गिरफ्तारी केवल उन असाधारण मामलों तक सीमित रखा जाना चाहिए, जहां अनिवार्य हो या आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की आवश्यकता हो। तर्कहीन और अंधाधुंध गिरफ्तारियां मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हैं। मोहम्मद तबिश राजा की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की।
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अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोहत्या के मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी है। इस दौरान न्यायमूर्ति सिद्धार्थ की एकल पीठ ने कहा कि अदालतों ने बार-बार कहा है कि गिरफ्तारी पुलिस के लिए अंतिम विकल्प होना चाहिए। गिरफ्तारी केवल उन असाधारण मामलों तक सीमित रखा जाना चाहिए, जहां अनिवार्य हो या आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की आवश्यकता हो। तर्कहीन और अंधाधुंध गिरफ्तारियां मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन हैं। मोहम्मद तबिश राजा की अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की।

वाराणसी के लंका थाना में मोहम्मद तबिश राजा पर गोवध अधिनियम, पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और पशु वध मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपी ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। अधिवक्ता ने दलील दी कि आवेदक को गोवध अधिनियम और पशु क्रूरता अधिनियम के मामले में फंसाया गया है। वहीं, अपर शासकीय अधिवक्ता ने अग्रिम जमानत की प्रार्थना का विरोध किया। कहा कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर हैं। केवल काल्पनिक भय के आधार पर अग्रिम जमानत नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने 1994 के जोगिंदर कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला दिया। इसमें सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पुलिस आयोग की तीसरी रिपोर्ट का उल्लेख किया था कि भारत में पुलिस की ओर से की गईं गिरफ्तारियां पुलिस में भ्रष्टाचार का मुख्य स्रोत हैं। रिपोर्ट में आगे बताया गया कि 60 प्रतिशत गिरफ्तारियां या अनावश्यक थीं या अनुचित थीं ।

कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक बहुत ही कीमती मौलिक अधिकार है। ऐसे में विशिष्ट परिस्थितियों में ही आरोपी की गिरफ्तारी की जानी चाहिए। कोर्ट ने गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना आवेदक को अग्रिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया।

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