10 अप्रैल 1755 को जर्मन चिकित्सक डॉ. सैमुअल हैनिमैन का जन्म हुआ था। जिन्होंने होम्योपैथी नामक चिकित्सा पद्धति की खोज की। विश्व को चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई पहचान देने के लिए हैनिमैन के जन्म दिवस के दिन ही विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है।
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के होम्योपैथी प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. पंकज शुक्ला (एमडी) ने कहा कि लोगों में होम्योपैथी से संबंधित फैली भ्रांतियां बिल्कुल भी गलत है। होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति में रोगों का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है। असाध्य रोगों में यह पद्धति काफी कारगर है। इस इलाज का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।
राजकीय होम्योपैथिक चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी डॉ. अनिल कुमार गुप्ता ने कहा कि अगर कोई मरीज शुरूआत से ही रोगों का इलाज कराता है तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी होम्योपैथिक दवाओं से ठीक हो सकती है। मरीज यदि नियमों का पालन करे तो उसे कहीं और जाने की जरूरत भी नहीं है और जल्दी से ठीक भी हो जाएगा।
1. भदोही के सुनील बिंद (28 वर्ष) के दोनों गुर्दे में पथरी थी। उसने कई जगहों पर इलाज कराया लेकिन ठीक नहीं हुआ तो उसने ऑपरेशन भी कराया, इसके बाद भी ठीक नहीं हुए। होम्योपैथी इजाज से अब वे ठीक हैं।
2. सुंदरपुर की नीलम ( 38 वर्ष) को गर्र्भाशय में गांठ था। उसने कई महिला डाक्टरों से इलाज कराया, लेकिन ठीक नहीं हो पाई। जब उसने होम्योपैथी में इलाज कराया तो बिना ऑपरेशन के समस्या ठीक हो गई।
3. गौरीगंज निवासी दीपमाला को यूरिन इंफेक्शन की बीमारी थी। उसने कई एलोपैथी के डॉक्टरों से इलाज कराया। लेकिन आराम नहीं मिला। उसने होम्योपैथी में इलाज कराना शुरू किया तो बीमारी ठीक हो गई।
4. चौक के महेश तिवारी को प्रोस्टेट कैंसर की शिकायत थी। मरीज को इससे कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। डाक्टर ने आपरेशन की सलाह दी। बाद में उन्होंने होम्योपैथी दवा से बीमारी ठीक की।