बिल्डिंग के बी-ब्लॉक की लिफ्ट अभी 10 से 15 दिन तक काम नहीं करेगी। ब्लॉक की बिजली भी गुल है। ऐसे में लोगों को रहने की बड़ी समस्या है। अपार्टमेंट के कुछ लोगों ने आसपास इलाकों के होटलों और गेस्ट हाउस में कमरा लिया है। ब्लाक के भूतल और दूसरी मंजिल के लोगों को छोड़ दिया जाए तो अधिकतर लोग अपने परिचितों और होटलों में ठौर लिया है।
परिसर में अब भी चार से पांच परिवार खुले आसमान के नीचे हैं। फ्लैट नंबर 401 में रहने वाले राकेश व उनकी पत्नी मीना जब भी अपने फ्लैट की ओर देखती हैं, तो उनकी आखों से आंसू आ जाते हैं। मीना का बड़ा बेटा आयुष आईआईटी की तैयारी करने के लिए बोर्ड परीक्षाओं के बाद इंदौर जाने वाला था। कुछ दिनों बाद उसकी दसवीं की बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू होने वाली है। लेकिन उसकी सारी किताबें जलकर खाक हो चुकी है।
अब तक जांच में यह तो तय हो गया कि बिल्डिंग में आग सुरक्षा उपाय से जुड़े संसाधन नहीं थे। पाइप छोटी थी तो वहीं प्रशिक्षित पंप आपरेटर भी नहीं थे। छत के दरवाजे पर ताला जड़ा हुआ था। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को अंदर आने में कई दिक्कतें हुईं। जिला प्रशासन की ओर से गठित टीम में वीडीए, अग्निशमन विभाग, जिला और पुलिस की संयुक्त टीमें जांच कर रही है।