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काशी में होली की ठिठोली शुरू

Fri, 18 Mar 2016 02:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला वाराणसी
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हर तरफ मस्ती ही मस्ती...
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मिथिला की कीचड़ की होली से अलग काशी में मशान की भी अनूठी होली दिखेगी। मस्ती और नाजोअदा के लिए मशहूर बनारस की गलियों में रंगीली होली आ गई है। काशी में होली की शुरुआत तो रंगभरी एकादशी के दिन बाबा विश्वनाथ के स्वर्ण शिखरों वाले मुक्तांगन से होगी लेकिन पक्के महाल के चौखंभा में होली के रंग छाने लगे हैं। वैष्णवों के षष्ठपीठ गोपाल मंदिर में ठाकुर जी वसंत पंचमी से ही होली खेल रहे हैं। डफ-मृदंग बजने लगे हैं। मंदिरों में फाग गाए जाने लगे हैं, गले में ढोल लटकाकर मुहल्लों के युवकों की टोलियां होलिका का चंदा मांगने निकली हैं तो अल्हड़, फक्कड़ों की मंडली सीलबट्टे पर भंग के तरंग में रमने लगी है।
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हवेलियों के बीच से गुजरी पक्के महाल की संकरी गलियों में होली के नायाब रंग दिखते रहे हैं। चाहे झक्कड़ शाह की शेरवाली कोठी हो या भारतेंदु भवन। रईसों के इस मुहल्ले में कभी टेसू के फूलों के रंग से लोग लोग होली खेला करते थे। हालांकि यहां अब बदलाव आ गया है। अब न तो वो रंग बनाने वाले रहे न उस तरह के मिजाजी लोग। फिर भी रंगों के त्योहार पर आपसी प्रेम अभी वैसा ही है। भिखारीदास लेन में भांग घोंटने का सिलसिला शुरू हो गया है। ग्वालदास साहू लेन के उपदेश चतुर्वेदी पप्पी गुरु रसभरी लेकर पहुंचते हैं तो छोटेलाल गोस्वामी भांग घोंटने में जुटे रहते हैं। बांसफाटक के राज कुमार रस्तोगी, मणिकर्णिका के कन्हैया पाठक के अलावा मुहल्ले के कई रसिक मिजाजी पहुंचते हैं और भांग-ठंडई की मस्ती शुरू हो जाती है।


बाबू भारतेंदु हरिश्चंद्र के वंशज प्रो. गिरीश चंद्र चौधरी बताते हैं कि चौखंभा में होली वसंत पंचमी से ही शुरू है। गोपाल मंदिर में ठाकुर जी के खिलौनों में पिचकारी शामिल कर दी गई है। अष्टछाप की कीर्तन मंडली भोग दर्शन के समय फाग की धुनों पर ही डफ के साथ मृदंग पर पदों का गायन कर रही है। गुजराती समाज के तमाम युवा स्वांग रचाकर दर्शन के समय मंदिर में देखे जाने लगे हैं। भारतेंदु भवन में भी ठाकुर जी सुबह रोज होली खेलते हैं। रंगभरी एकदशी पर जब बाबा विश्वनाथ के दरबार में गुलाल उड़ेंगे, तब से पांच दिन ठाकुर जी पिचकारी से होली खेलेंगे।
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उध्‍ार, भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के मुहल्ले हड़हासराय में चीन की शहनाई बिक रही है। अंतर बस इतना है कि यह शहनाई सुरों से नहीं बल्कि रंगों से सामने वाले को सराबोर कर देगी। काशी के बाजार में फागुनी बयार खुलकर बहने लगी है। दूकानों पर रंग-बिरंगी व आकर्षक पिचकारियां नजर आ रही हैं।  दाल मंडी, हड़हासराय, चौक, लहुराबीर, नई सड़क, मैदागिन, लक्सा, लंका सहित विभिन्न बाजार में रौनक देखते ही बन रही है। रंगों के त्योहार के लिए सजी दूकानों पर खरीदार भी जुट रहे हैं। हर कोई अपनी पसंद के अनुरूप पिचकारियां और रंग खरीदकर ले जा रहा है।


होली के बाजार में इस बार भी चीन में बने सामान का दबदबा नजर आ रहा है। खास बात यह है कि इन सामानों में शहर और यहां के लोगों के मिजाज का भी पूरा ख्याल रखा गया है। अबकी होली के बाजार में लोगों को शहनाई और बांसुरी वाली पिचकारी खूब रास आ रही है। यह रंग भी बरसाएगी और इससे सुर भी निकलेंगे। इसके अलावा पेंसिल पिचकारी भी बच्चों को लुभा रही है। बाजार में डायनासोर की आकृति वाली भी एक पिचकारी है जो दिन में रंगों की बौछार करेगी और रात में खूबसूरत रंग-बिरंगी रोशनी से नहलाएगी।
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