असत्य और बुराई की प्रतीक होलिकाओं को काशी में मंगलवार की मध्यरात्रि के बाद सविधि मंत्रोच्चार के साथ जलाया गया। हवन, पूजा के बाद होलिकाओं में पुरोहितों ने आग लगाई। जौ, गेहूं और तीसी की बालियों के साथ परिक्रमा कर अच्छाई को ग्रहण करने का संकल्प लिया गया। बुधवार को काशी की सड़कों, गलियों से लेकर गंगा तटों तक रंगों की बौछार होगी।
भद्राकाल की वजह से काशी में मंगलवार की आधी रात के बाद भी लोगों को होलिका दहन के लिए मुहूर्त का इंतजार था। भोर में 3:18 बजे के बाद युवकों की टोलियां गले में ढोल, नगाड़ा लटका कर बाजे गाजे के साथ घर-घर पहुंचने लगीं। पुरोहितों ने होलिकाओं की सविधि पूजा की। इस दौरान ढुंढा राक्षसी की भी पूजा की गई। इसके बाद होलिकाओं में आग लगाई गई।
लोगों ने गोबर से बनी माला के अलावा अन्य वस्तुओं को होलिका में समर्पित किया। होलिकाओं में आग लगने के साथ ही परिक्रमा की जाने लगी। किसी ने पांच तो किसी ने 11 बार जौ, गेहूं की बालियों से परिक्रमा की। कहीं होलिकाओं की राख से तिलक लगाकर शुभकामनाएं दी गईं तो कहीं लोग होलिका की आग भी शुभ के तौर पर घर ले गए। उसी आग से पापड़ सेंक कर परिवारीजनों को खिलाया गया। होलिका दहन के दौरान लोगों ने अच्छाई ग्रहण करने का संकल्प लिया। बुधवार को रंगों की होली होगी। दशाश्वमेध, गोदौलिया, दालमंडी, मैदागिन, रामापुरा, लंका, अस्सी, भदैनी, मछोदरी, हरतीरथ, विश्वेश्वरगंज, अर्दली बाजार, पांडेयपुर समेत अनेक इलाकों में होलिकाएं जलाई गईं। कुछ इलाकों में मध्यरात्रि के बाद ही होलिका दहन कर दिया गया। ग्राम्यांचलों में भी मुहूर्त के अनुसार होलिका दहन किया गया।