बताया कि इसके लिए हरिद्वार में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच उसने हिंदू धर्म ग्रहण किया और अपना नाम भी बदल दिया। 2020 अप्रैल में दिल्ली से कानपुर आते समय मैनपुरी के पास बस पलट गई। इससे छत से कूदते समय लगी चोट फिर उभर गई और वह बीमार हो गई। इस बीच इलाज के दौरान पता चला कि वह बोन टीबी से ग्रसित हो गई है।
सात बरस बाद गत अप्रैल में लॉकडाउन के दौरान वह यहां अपने घर आई। मगर बाप उसे रखने को तैयार न हुआ। घरवालों को जब पता चला कि उसने अपना धर्म परिवर्तित कर लिया है तो वे और खफा हो गए। लड़की का आरोप है कि उसके बाप ने दो बार उसे घर से निकाल कर बाहर कर दिया। जबकि वह शरीर से इतनी अक्षम है कि कुछ नहीं कर सकती।
औराई क्षेत्र के सेउर गांव निवासी नितेश चौबे को जब यह बात पता चली तो उन्होंने उसे घर में रखवाया और भोजन की व्यवस्था करने के साथ ही उसकी बीमारी की जानकारी ट्वीट के जरिए शासन तक पहुंचाई। जिला प्रशासन ने समुचित इलाज की व्यवस्था करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया। जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि लड़की के इलाज के लिए सीएमओ को निर्देश दिया गया है। उनकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा के लिए भी पुलिस को ताकीद किया गया है।
सुरक्षा के लिए दो पुलिसकर्मी तैनात, बीमारी का इलाज स्थानीय स्तर पर नहीं
बाप पर गंभीर आरोप लगाने वाली युवती की सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात हो गई है। गुरुवार को औराई थाने के दो सिपाहियों को लड़की के घर पर तैनात कर दिया गया। साथ ही औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की टीम इलाज के लिए लगाई गई है।
सीएचसी प्रभारी डॉ. अशफाक ने कहा कि युवती की रीढ़ की हड्डी डैमेज हो गई है। उसे ऐसी समस्या है, जिसका इलाज पूरे मंडल में नहीं है। केवल पीजीआई में है। इलाज की पूरी रिपोर्ट एसडीएम को दे दी है। आगे जैसा निर्देश होगा, किया जाएगा।