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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सनबीम स्कूल वरुणा में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम, अपर पुलिस आयुक्त बोले- जनजागरण की भाषा का बढ़ रहा दायरा

Wed, 15 Sep 2021 12:57 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कार्यक्रम में अपर पुलिस आयुक्त ने कहा कि विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी को तीसरा स्थान प्राप्त है। हिंदी के लिए गर्व की बात है कि यह दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय बनी है। 
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अपर पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय सुभाष चंद्र दूबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदी के प्रचार-प्रसार और उसको बढ़ावा देने के उद्देश्य से अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से चलाए जा रहे हिंदी हैं हम अभियान से जुड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हिंदी दिवस पर सनबीम स्कूल वरुणा में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपर पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय सुभाष चंद्र दूबे ने कहा कि हिंदी जनजागरण की भाषा है और इसका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे में इसकी पहचान बनाए रखना हम सब की जिम्मेदारी है। 
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कार्यक्रम में अपर पुलिस आयुक्त ने कहा कि विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी को तीसरा स्थान प्राप्त है। हिंदी के लिए गर्व की बात है कि यह दुनिया के कई देशों में लोकप्रिय बनी है। उन्होंने छात्रों को सफल कॅरियर बनाने के लिए भी हिंदी को सशक्त माध्यम बताया।
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सनबीम शिक्षण समूह के अध्यक्ष डॉ. दीपक मधोक ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए कहा कि यह गौरव की बात है कि सीबीएसई की परीक्षा में विद्यार्थी हिंदी और संस्कृत में बेहतर नंबर पा रहे हैं। निदेशिका भारती मधोक ने भी हिंदी के उत्थान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।


अतिथियों ने अमर उजाला के अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के अभियान हिंदी के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित होंगे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान से हुआ। इस दौरान प्रधानाचार्य डॉ. अनुपमा मिश्रा, नंदिता सिंह आदि लोग मौजूद रहे। 
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सनबीम स्कूल वरुणा में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
छात्र सूर्यांश सिंह ने कहा कि विद्यालय में हिंदी की पढ़ाई करने के साथ ही अब तो इससे जुड़ी प्रतियोगिताओं में भी बढ़-चढ़कर भागीदारी करते हैं। हिंदी की अपनी एक अलग अहमियत हैं। इस तरह के आयोजनों से बहुत कुछ सीखने का मौका मिला, जो छात्र जीवन से लेकर अन्य जगहों पर उपयोगी होगी। 

छात्र ऋतुराज ने कहा कि  हिंदी लिखने के साथ-साथ बोलने में जो गर्व की अनुभूति होती है, उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। भले ही विषम परिस्थितियों में कभी अंग्रेजी में बोलना पड़ता है लेकिन, हिंदी की जो मिठास है, वो शायद किसी अन्य भाषा में नहीं मिलती है। 
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