ग्रामीण और परिजन नदी में जलकुंभी हटाकर रितेश की तलाश में जुट गए। इसके बाद पांच भैंस घाट के आसपास ही मृत अवस्था में उतराई हुई मिलीं। पुलिस को सूचना मिली तो एसडीआरएफ को बुलाया गया। दोपहर में पहुंची एसडीआरएफ टीम ने नदी में काफी तलाश की लेकिन रितेश को ढूंढने में असफल रही।
एनडीआरएफ टीम के अनुसार गोमती नदी में अधिक जलकुंभी होने की वजह से टीम काम नहीं कर पा रही है। गांव के युवा रितेश को ढूंढने जुटे रहे। उधर, बेटे के नदी में डूबने की सूचना पाकर मां संतरा देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। पिता थानेदार के दो पुत्र में रितेश छोटा था।
फैक्ट्रियों से छोड़े गए पानी और जलकुंभी से गोमती नदी का पानी जहां प्रदूषित हो रहा है, वहीं इस तरह की घटना हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार रजला पीपा पुल बनने से जौनपुर की तरफ से आ रही जलकुंभी पुल के पास रुक गई है। जो काफी काफी दूर तक फैल गई है। नदी में ज्यादा जलकुंभी के बीच रितेश फंस गया। बेटे के नदी में डूबने का गम में पिता थानेदार अपना होश खो बैठे थे। नदी के किनारे बैठ कर अपने पुत्र के बारे में लोगों से पूछते रहे आखिर कैसे मेरा बेटा आएगा। वहीं ग्रामीण गमगीन बाप को ढांढस बंधाते रहे। ग्रामीण भी गमगीन रहे।