नमाज के बाद ज्ञानवापी से बाहर निकलते नमाजी
- फोटो : अमर उजाला
ज्ञानवापी परिसर में साक्ष्यों व शिवलिंग को क्षति पहुंचाने के आरोप में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी व सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई पूरी हो गई है। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने आदेश को सुरक्षित कर लिया गया है। जल्द ही इस मामले में आदेश जारी होने की उम्मीद है।
जिला जज की अदालत में निगरानीकर्ता जितेंद्र सिंह बिसेन की तरफ से शिवम गौड़, अनुपम द्विवेदी और मान बहादुर सिंह ने दलीलें पेश कीं। उन्होंने कहा कि भले ही ज्ञानवापी से जुड़ा सिविल मामला लंबित है, मगर वहां का धार्मिक स्वरूप बदला जा रहा है और आपराधिक कार्य किया जा रहा है। ऐसे में फौजदारी अदालत से ही राहत मिल सकती है।
उधर, डीजीसी फौजदारी आलोक चंद्र शुक्ल ने निचली अदालत के आदेश को सही बताते हुए निगरानी खारिज करने योग्य बताया। जिला जज ने सुनवाई के बाद आदेश के लिए पत्रावली सुरक्षित रख ली है। यहां बता दें कि विश्व वैदिक सनातन संघ ने 14 जून को ज्ञानवापी परिसर में साक्ष्यों के अलावा शिवलिंग को क्षति पहुंचाने के खिलाफ वाद दाखिल करने के लिए जिला न्यायालय में रिवीजन याचिका दाखिल की थी। इससे पहले 30 मई को विसेन के आवेदन को स्पेशल सीजेएम ने यह कहते हुए खारिज किया था कि मामला सिविल कोर्ट में भी चल रहा है।