वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने संबंधी आवेदन पर सुनवाई और प्राचीन मूर्ति स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर को लेकर चल रहे मुकदमे पर रोक संबंधी हाईकोर्ट का आदेश कोर्ट में दाखिल करने की तिथि छह मार्च नियत की गई है। यह आदेश सिविल जज (सीनियर डिवीजन) फास्ट ट्रैक कोर्ट आशुतोष तिवारी की अदालत ने मंगलवार को दिया।
अदालत में अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से अधिवक्ता एखलाक अहमद ने प्रार्थना पत्र देकर सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। कहा कि ज्ञानवापी प्रकरण से संबंधित मसले की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। हालांकि हाईकोर्ट के आदेश की कापी उपलब्ध नहीं है, लिहाजा इसके लिए समय दिया जाए।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद की ओर से दी गई दलीलों का विरोध करते हुए लार्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कहा कि सुनवाई पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने ज्ञानवापी परिसर के पुरातात्विक सर्वेक्षण के आवेदन पर अदालत से सुनवाई का अनुरोध किया। अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश की प्रति दाखिल करने और पुरातात्विक सर्वेक्षण संबंधी आवेदन पर सुनवाई के लिए छह मार्च की तिथि नियत कर दी।
इससे पहले अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद ने अदालत के क्षेत्राधिकार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि प्रकरण की सुनवाई का सिविल कोर्ट को अधिकार नहीं है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि सिविल कोर्ट को प्रकरण की सुनवाई का अधिकार है। इसी के बाद पुरातात्विक सर्वेक्षण संबंधी आवेदन पर नियमित सुनवाई का रास्ता साफ हुआ था।