एएसआई की तरफ से सालिसिटर जनरल ऑफ इंडिया द्वारा भी सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया जा चुका है कि इमारत को नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। इलाहाबाद हाईकोर्ट के गत तीन अगस्त के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक आलोक त्रिपाठी द्वारा एफिडेविट दायर किया गया था। उसमें स्पष्ट किया गया है कि एएसआई का वैज्ञानिक सर्वे पूर्णतया सुरक्षित रहेगा।
ऐसे में वर्तमान परिदृश्य में वजूखाने (शिवलिंग जैसी आकृति छोड़कर) की एएसआई सर्वे की अनुमति दी जाती है तो यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना नहीं होगी। वजूखाने को कोई नुकसान भी नहीं होगा और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार यथास्थिति बनी रहेगी। वजूखाना क्षेत्र का एएसआई सर्वे आवश्यक एवं दोनों ही पक्षों के हित में है।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से अधिवक्ता एखलाक अहमद, मुमताज अहमद, रईस खान व तौहीद खान ने आवेदन का पुरजोर विरोध किया। कहा कि वजूखाने को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सील किया गया है। वहां का सर्वे होने से सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना होगी। अदालत ने दोनों पक्ष की दलीलें सुनने के बाद पत्रावली सुरक्षित रखते हुए आदेश के लिए 21 अक्तूबर कि तिथि नियत कर दी।