ओपीडी में हर माह तीन-चार महिलाएं ऐसी समस्या लेकर आती हैं। जांच में पता चलता है कि गर्भाशय में टीबी मां बनने में रुकावट डाल रही है। छह माह से एक वर्ष तक नियमित दवा के सेवन से महिलाएं पूरी तरह ठीक होकर मां बनने की स्थिति में आ जाती हैं।
पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द, अनियमित मासिक धर्म, वजन तेजी से कम होना।
उपचार
ट्यूबरकुलीन स्किन टेस्ट के साथ ही ब्लड टेस्ट कराया जाता है। यूट्रस की बायोप्सी भी कराई जाती है। इसके अलावा जेनेटिक टेस्ट भी होता है, जिससे टीबी के इंफेक्शन का पता चलता है। ऐसे मरीजों को 6 महीने तक टीबी की दवा नियमित तौर पर खिलाई जाती है।