विंध्याचल के तिलई मौआर गांव में मां-पुत्री के मौत के बाद घर पर पसरा सन्नाटा। स्रोत- संवाद
मिर्जापुर। मां के ऊपर हर बच्चा विश्वास करता है। कुछ ऐसा ही सोचकर विंध्याचल के तिलई मौआर गांव में संजना ने कीटनाशक को ग्लूकोज बताकर दोनों बेटियों को पीने के लिए दे दिया। छोटी बेची आस्था ने मां की बात मानते हुए ग्लूकोज समझकर कीटनाशक पी लिया। बड़ी बेटी अतिस्या (12) समझदार थी। उसने मां को बाजार से कीटनाशक लाते हुए देख लिया था। संजना जब ग्लास में कीटनाशक का घोल बना रही थी तब भी अतिस्या ने देख लिया था। संजना ने सबसे पहले छोटी बेटी आस्था को ग्लूकोज बताकर कीटनाशक पीने को दिया। बड़ी बेटी ने पीने से मना कर दिया। इसके बाद वह घर से बाहर भागकर परिवार के अन्य लोगों को जानकारी दी। तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घटना के बाद गांव में चर्चा रही कि एक मां कैसे ममता का गला घोंट सकती है।
मायके वालो ने जताया विरोध, पति की हरकतों से जान देने का लगाया आरोप
बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान संजना और आस्था की मौत के बाद वाराणसी पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया। रविवार शाम को परिजन शव लेकर गंगा घाट पहुंचे तो मायके वालों ने ससुराल वालों पर आरोप लगाते हुए अंतिम संस्कार को रोक दिया। सूचना पर विंध्याचल पुलिस पहुंची। चुनार के रामगढ़ निवासी मृतका के भाई सतीश सिंह ने पुलिस को बताया कि संजना का पति अपने भाभी की बात मनाता था। पत्नी की बातों को नहीं सुनता था। इस कारण बहन ने जान दे दी। थानाध्यक्ष वेद प्रकाश पांडेय ने बताया कि मृतका के भाई ने आरोप लगाया है। बड़ी बेटी गुड़िया के भविष्य को लेकर चिंता जता रहा था। पुलिस और गांव के लोगों के समझाने पर अंतिम संस्कार कराया गया है। दोनों पक्ष ने उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठने की बात स्वीकार की है।
पहले भी दो बार कर चुकी थी आत्महत्या का प्रयास
विंध्याचल थानाध्यक्ष वेद प्रकाश पांडेय ने बताया कि संजना दो बार पहले भी आत्महत्या करने का प्रयास कर चुकी थी। एक बार जोपा पीपा पुल से कूदने का प्रयास किया था तो लोगों ने बचा लिया था। दूसरी बार सिंदूर पीकर जान देने का प्रयास किया था।