शिवाय विष्णु रूपाय अनुष्ठान में शुरू हुआ यज्ञ।
- फोटो : रोड़वेज बस में खड़े परीक्षार्थी।
वाराणसी। अमेरिका-ईरान सहित अन्य देशों में चल रहे युद्ध को रोककर शांति कायम करने की मांग हर धर्म के लोग कर रहे हैं। अलविदा जुमा में जहां नमाजियों ने शांति की दुआएं मांगी, वहीं मंदिरों, मठों और आश्रमों में शांति के लिए हवन और अनुष्ठान शुरू हो गया है। काशी में दक्षिण भारत के भी साधु-संत, वैदिक विद्वान और श्रद्धालु इसे कर रहे हैं।
कल्वाकोलानु चितरंजन दास मेमोरियल सेवा संगठन, तेलंगाना की ओर से तीन दिवसीय शिवाय विष्णु रूपाय अनुष्ठान शनिवार को मुमुक्षु भवन, अस्सी घाट में शुरू हुआ। श्री श्रृंगेरी शारदा पीठम के दोनों जगद्गुरुओं के आशीष से शुरू अनुष्ठान में विश्व शांति और धर्म की रक्षा के लिए संकल्प लिया गया। पहले दिन विष्णु सहस्रनाम पाठ हुआ। ब्रह्मश्री कल्वाकोलानु रामचन्द्रमूर्ति एवं गुरुपत्नी जयलक्ष्मी रामचन्द्रमूर्ति के सानिध्य में सुबह गणपति हवन, प्रार्थना पाठ, मंडपाधना, दीक्षा, ऋत्विक वरुण पंच गव्य प्रासन, अग्नि स्थापना, गणपति के अंग हवन, रुद्र नवग्रह आदि और गायत्री हवन हुआ।
दोपहर बाद लक्ष्य बिल्वार्चना हुआ। रामचन्द्रमूर्ति ने विष्णु दर्शन पर प्रवचन किया। उन्होंने बताया कि दूसरे दिन सुबह एक लाख रुद्राक्ष पूजन, लहरी व ललिता सहस्रनाम पारायण होगा। गुरु विश्वेश्वर के दर्शन और प्रवचन होंगे। अंतिम दिन, 16 मार्च को गायत्री हवन होगा और सामूहिक संध्यावंदन होगा। दक्षिण भारत के सौ वैदिक विद्वानों सहित पांच सौ श्रद्धालु अनुष्ठान में शामिल हैं। शृंगेरी मठ, महमूरगंज में तीन दिवसीय अति महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। सौ से अधिक विद्वानों ने हवन पूजन और श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर में मंत्रों से पूजित संगम, गंगा सहित पांच नदियों के जल से अभिषेक किया।