भारतेंदु हरिश्चंद्र ने मैदागिन में 1866 में पांच विद्यार्थियों से इस संस्था की शुरुआत की थी। 1910 में इस संस्था में हाईस्कूल की पढ़ाई शुरू हुई और इंटरमीडिएट की कक्षाओं का संचालन 1939 से आरंभ हुआ। चार अक्तूबर 1951 में कला और वाणिज्य के स्नातक पाठ्यक्रम यहां शुरू हुए। इस दौरान यह कॉलेज काशी हिंदू विश्वविद्यालय से संबद्ध था, इसके बाद गोरखपुर विश्वविद्यालय, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय और वर्तमान में यह 2009 से महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से संबद्ध है। 1958 में इसका नाम हरिश्चंद्र महाविद्यालय रखा गया और यहां पर लॉ की पढ़ाई भी शुरू हुई। इसके बाद इसको काशी विद्यापीठ से संबद्ध कर दिया गया।
महाविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। विश्वविद्यालय से सत्र के संदर्भ में निर्देश प्राप्त होते ही अंतिम तिथि की घोषणा की जाएगी। इसके साथ ही प्रवेश परीक्षाओं की तारीख भी घोषित होगी। कोरोना संक्रमण को देखते हुए सभी सुरक्षा मानकों के साथ प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराया जाएगा। - डॉ. ज्योेत्सना चतुर्वेदी, प्राचार्य