कभी चींटी के कैरिकेचर से अपने कला जीवन की शुरुआत करने वाला हरिओम यूं ही कामयाबी की चोटी पर नहीं पहुंचा। कला के प्रति उसका लगाव बचपन से ही था। छठवीं कक्षा में उसके बनाए चींटी के कैरिकेचर को देख तब उसके कला शिक्षक एनके पांडेय आश्चर्यचकित रह गए थे।
शनिवार को उन्हें जैसे ही हरिओम के विश्व कीर्तिमान पार करने की सूचना मिली, वह उसे बधाई देने क्वींस कॉलेज पहुंचे। बताया, हरिओम का कला के प्रति एक अलग ही लगाव था। जब उसने चींटी का कैरिकेचर दिखाया तो उन्हें जितना आश्चर्य हुआ, उतनी ही खुशी भी हुई।
अपनी रुचि, मेहनत और सतत प्रयास की बदौलत वह आज यहां तक पहुंचा है। जवाहर नवोदय विद्यालय गाजीपुर के प्रधानाचार्य मुख्तार आलम कहते हैं कि हरिओम ने विद्यालय का नाम रोशन कर दिया। उन्हें बेहद गर्व की अनुभूति हो रही है कि हरिओम ने विश्वरिकॉर्ड पार कर अपना अभियान जारी रखा है।
हरिओम के अभियान की शुरुआत से उसके साथ-साथ मौजूद कला शिक्षिका मधुलिका कुशवाहा की आंखों से खुशी के आंसू छलक रहे थे। कहा, जिस उपलब्धि के लिए वर्षों से मेहनत-साधना की गई, आज आंखों के सामने उसे साकार होता देखा तो अपनी खुशी नहीं रोक पाई।
हरिओम के पिता रमेश प्रसाद सिंह और माता गीता देवी बेटे की उपलब्धि पर फूले नहीं समा रहे थे। कामयाबी की खुशी ऐसी कि तीन दिन से जगे होने के बावजूद किसी के चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं था।
हरिओम के लांगेस्ट मैराथन ड्राइंग कैरिकेचर की निगरानी के लिए जिले के 62 प्रशासनिक और शैक्षिक अधिकारियों की टीम लगाई गई है। दो-दो अधिकारियों की चार-चार घंटे की शिफ्ट वार ड्यूटी यहां लगाई गई है। प्रशासनिक टीम की ओर से हरिओम के विश्व रिकॉर्ड अभियान का पूरा ब्यौरा गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को भेजा जा रहा है।