संकट मोचन संगीत समारोह में मुंबई से विख्यात बांसुरी वादक पंडित रूपक कुलकर्णी अपनी हाज़िरी हेतु जुड़ें। उन्होंने राग बागेश्री की अवतारणा की
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तीसरी प्रस्तुति में धारवाड़ से किराना घराने के कलाकार विजय पाटिल ऑनलाइन जुड़े। उन्होंने राग शंकरा में अनहत नाद महिमा बखानी...की मधुर प्रस्तुति ने आभासी दुनिया के श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। आलापचारी और रागदारी से उन्होंने श्रोताओं के अंतर्मन को छूने का सफल प्रयास किया। इसके बाद विजय पाटिल ने बोल बनाव की ठुमरी जाओ सइयां न बोलो मोसे..., रंग रंगीला छैल छबीला श्याम मोरा...और सांवरे आ जइयो जमुना किनारे मोरा गांव....के माध्यम से श्रोताओं की प्रशंसा बटोरी। उनके साथ तबले पर केशव जोशी, तानपुरा पर अशोक पाटिल और हारमोनियम पर वसव राज ने संगत की।
छठी निशा की चौथी प्रस्तुति में मुंबई से जुड़े युवा कलाकार एस. आकाश की मोहक बांसुरी वादन को श्रोताओं ने खूब पंसद किया। गायिकी अंग के वादन में गुरु पं. जयतीर्थ मेवुंडी का असर श्रोताओं ने भी महसूस किया। इसके पूर्व संगीत समारोह की पांचवीं निशा की चौथी प्रस्तुति में मेवाती घराने के सातवीं पीढ़ी के युवा कलाकार स्वर रतन शर्मा मुंबई से गायन की प्रस्तुति के लिए जुड़े। उन्होंने राग छाया नट में विलंबित एक ताल एवं दु्रत लय तीनताल की बंदिश की प्रस्तुति दी।
इसके बाद अगली प्रस्तुति बांसुरी वादन की रही। मुंबई से विख्यात बांसुरी वादक पंडित रूपक कुलकर्णी जुड़े। उन्होंने राग बागेश्री की अवतारणा की। इसके बाद अहमदाबाद से गायक पं. नीरज पारिख ऑनलाइन हुए। पं. जसराज के शिष्य पं. पारिख ने राग बिहाग में विलंबित एकताल एवं मध्य लय तीनताल में जसराज जी की रचना गाकर हनुमत दरबार में हाजिरी लगाई।