सांस्कृतिक संकुल में इंतजार करते जाइरीन
- फोटो : अमर उजाला
काशी से काबा का मुकद्दस सफर सोमवार से शुरू हो गया। पहली फ्लाइट से वाराणसी, इलाहाबाद समेत पूर्वांचल के दस जिलों के 155 जाइरीन रवाना हुए। बाबतपुर एयरपोर्ट से यह फ्लाइट पूर्वाह्न 11:11 बजे मदीना रवाना हुई।
रवानगी से पहले सांस्कृतिक संकुल अस्थायी हज हाउस में नूरानी माहौल नजर आया। फूलों और इत्र की खुशबू के बीच अपनों की आंखों में खुशी के आंसू थे। मां ने अपनी औलाद के माथे का बोसा लेकर तो बेटी ने हथेलियां चूम कर अब्बू को अलविदा कहा।
इन भावुक पलों में हज हाउस से बाबतपुर एयरपोर्ट तक जाइरीन के जत्थे के पहुंचने तक दुआओं का रंग और गाढ़ा होता गया। सावन के तीसरे सोमवार को एक ओर जहां शहर में कांवरियों का रेला था, तो वहीं दूसरी ओर सांस्कृतिक संकुल चौकाघाट से काशी से काबा के मुकद्दस सफर की भी शुरुआत हुई।
पहले दिन बनारस, इलाहाबाद, आजमगढ़, चंदौली, मिर्जापुर, मऊ समेत दस जिलों के 155 जाइरीन मदीना के लिए रवाना हुए। सुबह छह बजे से जाइरीन की इंट्री एयरलाइंस हॉल में शुरू हुई।
अस्थाई हज हाउस से जाइरीनों को लेकर पहली बस सुबह आठ बजे एयरपोर्ट रवाना हुई। सेंट्रल हज कमेटी के सदस्य डॉ. इफ्तेखार जावेद ने हरी झंडी दिखाई। रवानगी से पहले सामूहिक दुआख्वानी हुई।
वालिदैन को हज कराकर हासिल करेंगे सवाब
कोई मां को तो कोई अब्बू को हज कराने सफर-ए-हज पर रवाना
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अपने वालिदैन के हज की ख्वाहिश को पूरा करने के बहाने ही सही, बच्चों को भी हज का सवाब हासिल करने की खुशनसीबी हासिल हुई। आंखों में मदीने के दीदार की मन्नत लिए ऐसे कई जाइरीन सोमवार को सफर-ए-हज पर रवाना हुए।
मऊ, नई बाजार के 75 वर्षीय मोहम्मद मुर्तजा के साथ उनकी बेटी नन्ही खातून हज पर गई हैं। सफर के दौरान वह बुजुर्ग अब्बा का सहारा बनेंगी। रवानगी से पहले कहा कि अब्बा की बड़ी ख्वाहिश थी हज की। जब अम्मी थीं तो मौका नहीं लगा लेकिन अब्बा की ख्वाहिश तो पूरी करनी ही थी।
बुजुर्ग होने के चलते वह अकेले कहीं जा नहीं सकते, इसलिए मैं उनके साथ जा रही हूं। उनके साथ मुझे भी उस पाक सरजमीं पर सजदा करने की खुशनसीबी हासिल होगी।
वहीं 37 वर्षीय खलील अहमद अपनी अम्मी वहीदन खातून को हज पर ले गए हैं। साथ में उनकी पत्नी नुरेशा खलील भी हैं। खलील रामनगर पीएसी में तैनात हैं। अम्मी की ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी से कुछ दिन छुट्टी ली है।
66 वर्षीय वहीदन कहती हैं कि बेटे-बहू के साथ हज की मुराद आज पूरी होने जा रही है। अब मेरी ख्वाहिश बस इतनी है कि हज की इबादत को अल्लाह कबूल कर ले। उधर सोमवार को पहली फ्लाइट से कई युवा भी सफरे हज पर रवाना हुए।
मऊ खैराबाद के 28 वर्षीय अब्दुल अजीज और उनकी पत्नी समीना खातून, मदनपुरा के साड़ी कारोबारी दाऊद अहमद और उनकी पत्नी शाहिदा परवीन हज पर रवाना हुए। वहीं आजमगढ़ सरायमीर के रियाज अहमद भांजे इम्तियाज अहमद के साथ रवाना हुए।
इन जिलों के जाइरीन रवाना हुए
इलाहाबाद - 43, आजमगढ़ - 30, वाराणसी - 23, कौशांबी - 20, मऊ - 16, गाजीपुर - 8, मिर्जापुर - 7, महाराजगंज - 4, चंदौली - 2, गोरखपुर - 2