उनका कहना कि इस फव्वारे में उसी कुएं से मोटर लगाकर पानी की सप्लाई की जाती है। यासीन का मानना है कि पिछले दो साल पहले जब उन्होंने वहां पर सफाई कराई थी तो वहां पर कुछ नहीं मिला था। सभी मस्जिदों में इसलिए फव्वारे बनाए जाते हैं कि पानी गर्म नहीं हो। आप चाहे दिल्ली चले जाए या देश के किसी अन्य हिस्से में।
मस्जिदों में वजू के लिए बने जगह पर फव्वारे आपको दिख जाएंगे। शृंगार गौरी को लेकर उन्होंने कहा कि वहां जब भी कोई पूजा करना चाहे, कर सकता है। यह मंदिर मस्जिद से दूर है और बैरिकेडिंग से बाहर है। वहां पूजा करने पर मुस्लिम समाज को कोई एतराज नहीं है।
एसएम यासीन, संयुक्त सचिव अंजुमन मसाजिद कमेटी
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अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव का कहना कि ज्ञानवापी मस्जिद के ठीक पीछे पश्चिम की ओर दो कब्रें हैं। पहले यहां पर हर साल सालाना उर्स होता था, लेकिन अब उर्स नहीं होता है। यहां पर जब से मस्जिद बनी है तब से नमाज पढ़ी जा रही है। उनका कहना कि मस्जिद में जो भी ईंटें और मैटिरियल लगे हैं, सब इसी जगह के हैं। दूसरे देशों से कुछ नहीं मंगाया गया है। बेवजह लोग इसके बारे में गलत प्रचार कर रहे हैं। लोगों को आपसी सौहार्द के साथ रहना चाहिए।
श्री काशी विश्वनाथ मुक्ति आंदोलन ने ज्ञानवापी परिसर के वजूखाने में मिले शिवलिंग को संरक्षित करने की मांग की है। आंदोलन के अध्यक्ष सुधीर सिंह ने मंडलायुक्त को ज्ञापन सौंपकर सनातनी हिंदुओं की भावनाओं का ख्याल रखते हुए शिवलिंग को संरक्षित करने का अनुरोध किया है।