अभी तक तो मुकदमे से संबंधित सब कुछ ठीक चल रहा था। लेकिन आप लोगों के द्वारा भगवान आदि विश्वेश्वर स्वयंभू ज्योतिर्लिंग की कार्बन डेटिंग की मांग करना अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है। कार्बन डेटिंग या अन्य किसी प्रकार की वैज्ञानिक जांच यदि करवानी ही थी तो बाकी पूरे परिसर की करवानी चाहिए थी।
जिसमें हमारा पूरा सहयोग और समर्थन आप सभी को मिलता। लेकिन आप लोगों ने शिवलिंग की आयु, आकृति और प्रकृति इत्यादि के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए पवित्र शिवलिंग की कार्बन डेटिंग की मांग की। यह हमारी दृष्टि में उचित नहीं है।
हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है।
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ज्ञानवापी सर्वे में मिले शिवलिंग की कार्बन डेटिंग होगी या नहीं, इस पर कोर्ट का आदेश सात अक्तूबर को आएगा। इस मामले में बीते गुरुवार को सुनवाई पूरी होने के बाद आदेश के लिए जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने सात अक्तूबर की तारीख नियत की है।