बीएचयू ट्रामा सेंटर लाए गए झुलसे लोग
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सोमवार सुबह हादसे की जानकारी होने के बाद परिवार को ढाढस बंधाने वालों का तांता लगा रहा तो दूसरी ओर परिजनों के आंसू नहीं थम रहे थे। सभी उस घड़ी को कोस रहे थे जब बच्चों की जिद की वजह से उनको दुर्गा पूजा दिखाने ले जाना पड़ा था। इधर, परिजन और ग्रामीण अब शव का इंतजार कर रहे हैं ताकि एक साथ तीनों चिताओं को सजाकर उन्हें अंतिम विदाई दी जा सके।
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दुर्गा पूजा पंडाल अग्निकांड की जांच के लिए गठित एसआईटी टीम ने जांच में प्रथम दृष्टया पाया कि आग लगने का कारण हाइलोजन लाइट का गर्म होना था। हाइलोजन लाइट के गर्म होने के कारण आग लग गई। दुर्गा पंडाल में भीषण आग ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया।
घटना में आयोजन समिति की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। पंडाल स्थल पर चलने वाले शो में प्रोजेक्टर के माध्यम से धार्मिक कार्यक्रम दिखाए जा रहे थे। गुफानुमा बने स्थल में आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता है। आग लगने के बाद अंदर भगदड़ मच गई। इससे कई महिलाएं और बच्चे गिर गए। आग तेजी से फैली और उसके चपेट में सभी आ गए।
भदोही में दुर्गा पंडाल में लगी भीषण आग
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भीषण अग्निकांड के बाद पुलिस ने भी कार्रवाई शुरू कर दी है। सोमवार सुबह पुलिस ने दुर्गा पूजा आयोजन समिति के अध्यक्ष संदीप उर्फ बच्चा यादव के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके अलावा समिति के 20 से अधिक अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया गया।
बच्चा यादव हादसे के बाद से फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। पंडाल में लाइटिंग करने वाले कर्मचारी समेत पांच लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद औराई कोतवाली में गहमागहमी का माहौल है। पुलिस के अनुसार, शुरूआती जांच के दौरान व्यवस्थाओं में आयोजन समिति की लापरवाही सामने आई है।
औराई तहसील क्षेत्र में नरथुआं स्थित पंडाल सबसे आकर्षक बनता है। यहां नवरात्र में धार्मिक शो भी प्रोजेक्टर के माध्यम से दिखाया जाता है। उक्त शो देखने के लिए नरथुआं, उपरौठ, बारीगांव, औराई, घोसिया, भवानीपुर, जेठूपुर, उगापुर, औराई सहित दर्जन भर से अधिक गांव की महिलाएं और बच्चे पहुंचते हैं। रविवार को भी उक्त गुफानुमा स्थल पर 150 से अधिक महिलाएं और बच्चे मौजूद रहे। आग लगी तो अंदर भगदड़ मच गई। आने-जाने का एक मात्र गेट होने से बच्चे और महिलाएं अंदर ही गिर गईं। उक्त गुफा फाइबर और प्लास्टिक के पन्नी से बनाई गई थी। इससे कुछ ही पलों में पूजा पंडाल धू-धू कर जलने लगे।
वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और अधिकतर लोग झुलस गए। बताया जाता है कि तीन साल पूर्व भी उक्त पंडाल में आग लगी थी, लेकिन उस दौरान समिति के लोगों ने किसी तरह आग बुझा ली थी। तीन साल पूर्व की हुई घटना के बाद भी अधिकारियों ने न तो वहां की तैयारियां देखी न ही आयोजन समिति की ओर से दी गई व्यवस्था ही जांची जबकि पंडाल में भारी भीड़ उमड़ रही थी। अगर पहले ही पंडाल में आने-जाने की व्यवस्था की गई होती तो घटना इतनी बड़ी नहीं होती।