पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश
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18 अगस्त 2021 को पांच महिलाओं ने श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन की मांग को लेकर सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में वाद दायर किया था। इस मामले में अदालत ने सर्वे की कार्रवाई कराई थी। इसके बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को रद्द करने की गुहार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की पोषणीय था यानी मामला सुनवाई योग्य है अथवा नहीं पर निर्णय के लिए जिला जज को आदेश दिया था। जिला जज की अदालत में हिंदू पक्ष ने इस मामले को सुनवाई योग्य करार देने के लिए कई दलीलें दी, इसमें उन्होंने बताया कि मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब ने हिंदू मंदिर के स्ट्रक्चर पर मस्जिद बनवा दी।
उधर मुस्लिम पक्ष की ओर से इस संपत्ति को वक्फ बताते हुए मामला खारिज करने की मांग की है। दोनों पक्षों की दलीलों पर ही जिला अदालत अपना फैसला सुनाएगी। फिलहाल शहर में सुबह से ही पुलिस बल तैनात है। पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने शहरवासियों से अपील की है की काशी की अमन और शांति के लिए हम सब अपनी जिम्मेदारी निभाएं। कोई ऐसा काम ना करें जिससे शांति व्यवस्था पर जरा भी प्रभाव पड़े।
पिछली सुनवाई पर दोनों पक्ष की बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। हिंदू पक्ष की ओर से दलीलें पेश करने के बाद मुस्लिम पक्ष ने भी मस्जिद को औरंगजेब की जमीन पर बनी बताते हुए कई प्रमुख दलीलें पेश की हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि जहां पर प्राण प्रतिष्ठा होती है वह स्थल का स्वामित्व अनंत काल तक नहीं बदलता। इस लिहाज से यह जमीन मस्जिद या वक्फ की नहीं है। राम जानकी प्रकरण 1999 के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के नजीर को भी सामने रखा गया। वहीं इसके अतिरिक्त अयोध्या प्रकरण को लेकर भी हिंदू पक्ष ने अदालत में दलील रखी है।
वहीं मुस्लिम पक्ष का दावा है कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। वक्फ एक्ट के तहत इसकी सुनवाई सिविल अदालत में नहीं हो सकती है। श्रृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की मांग करने वाले प्रार्थना पत्र की प्रकृति जनहित याचिका जैसी है। इसमें दर्शन-पूजन का अधिकार पूरे हिंदू समाज के लिए किया गया है। इसलिए इसकी सुनवाई स्थानीय अदालत में नहीं हो सकती है। दीन मोहम्मद बनाम सरकार के 1936 के मुकदमे में अदालत ने ज्ञानवापी को मस्जिद माना है और उसमें नमाज का अधिकार दिया है।
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