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Gyanvapi Case: कल फिर होगी सुनवाई, अंजुमन बोला- वक्फ की संपत्ति का मसला सिविल कोर्ट नहीं सुन सकती

Mon, 22 Aug 2022 04:17 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत में सोमवार को ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले की मेरिट पर सुनवाई हुई। 
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ज्ञानवापी मामले में सुनवाई के लिए अपने अधिवक्ता और पक्षकार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के ज्ञानवापी मामले में श्रृंगार गौरी प्रकरण की मेरिट पर सोमवार को जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में सुनवाई हुई। अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की ओर से जवाबी बहस में ज्ञानवापी को वक्फ बोर्ड की संपत्ति होने के दावे के समर्थन में कानूनी साक्ष्य व दस्तावेज कोर्ट में दाखिल की गई। वादी और प्रतिवादी पक्ष की सहमति से 23 अगस्त को भी अंजुमन की जवाबी बहस जारी रहेगी।

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एडवोकेट शमीम अहमद ने अदालत में वक्फ एक्ट के प्रावधानों को दर्शाते हुए दावे के 3-4 बिंदुओं को पढ़ा। 1291 फसली वर्ष में दर्ज इंद्राज अन्य सबूत व साक्ष्य दाखिल किया गया। वादिनी महिलाओं ने वाद के समर्थन में साक्ष्य नहीं दाखिल किया था उससे सम्बंधित साक्ष्य व सबूत दाखिल किया गया।

कहा गया कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ की संपत्ति है। यह वक्फ संपत्ति के तौर पर दर्ज भी है। इसलिए ज्ञानवापी मस्जिद से संबंधित इस वाद के सुनवाई का अधिकार सिविल कोर्ट को नहीं बल्कि वक्फ बोर्ड लखनऊ को है, ऐसे में यह मामला सुनवाई योग्य पोषणीय नहीं है।

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अंजुमन की तरफ से बहस अभी जारी है। कोर्ट में वादी और प्रतिवादी पक्ष की सहमति से मंगलवार को भी जवाबी बहस जारी रहेगी। फिर वादिनी महिलाओं के एडवोकेट की तरफ से जवाबी बहस का प्रतिउत्तर कोर्ट की अनुमति से की जा सकेगी। अदालत में अंजुमन की तरफ से नियुक्त अधिवक्ता योगेन्द्र सिंह और मधू बाबू कोर्ट में नहीं पहुंचे जबकि रईस अहमद, मुमताज अहमद, मिराजुद्दीन सिद्दकी व एजाज अहमद मौजूद रहे। 

महिला वादियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु जैन,सुभाष नन्दन चतुर्वेदी, मानबहादुर सिंह, डीजीसी सिविल महेंद्र प्रसाद पांडेय समेत वादिनीगण व पैरोकार कोर्ट में मौजूद रहे।
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पिछली सुनवाई में मसाजिद कमेटी पर लगा था 500 का हर्जाना

इससे पहले पिछली सुनवाई में लगातार तारीख को बढ़ाने की मांग को देखते हुए अदालत ने नाराजगी जाहिर करते हुए मसाजिद कमेटी 500 रुपये का हर्जाना लगाया था। अधिवक्ता अभय यादव के निधन का हवाला देकर अंजुमन इंतेजामिया ने योगेंद्र सिंह मधु बाबू और शमीम अहमद का वकालत नामा दाखिल कर बहस की तैयारी के लिए 10 दिन के समय की मांग कर स्थगन प्रार्थना पत्र दिया था।

डीजीसी सिविल महेंद्र पांडेय के मुताबिक, इस पर जिला जज ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सुनवाई की जा रही है जिसे विलंबित किया जा रहा है। कोर्ट ने सिर्फ दो दिन का मौका देते हुए अंजुमन पर 500 रुपये का हर्जाना लगाया और सुनवाई की तिथि 22 अगस्त नियत की थी। 
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