इससे प्रार्थीगण और समस्त हिंदू जनमानस की भावनाएं आहत हुई हैं। पुलिस द्वारा कुछ नहीं किए जाने पर अदालत की शरण ली गई थी। पोषणीयता के बिंदु पर बहस सुनने के बाद निचली अदालत ने सुनवाई योग्य नहीं पाते हुए आवेदन को खारिज कर दिया था।
इसे पुनरीक्षण याचिका के माध्यम से जिला जज की अदालत में चुनौती दी गई है और कहा गया है कि निचली अदालत का आदेश त्रुटिपूर्ण है। जिला जज की अदालत ने इस पर सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तिथि नियत की है।