वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती, एक सितंबर को सुनवाई
ज्ञानवापी परिसर से जुड़े 1991 के मूल वाद में 2019 में हुई वाद मित्र की नियुक्ति को चुनौती देने वाली रिवीजन याचिका पर अपर जिला जज अष्टम अमित कुमार तिवारी की अदालत में सुनवाई हुई। अगली सुनवाई एक सितंबर को होगी।
1991 में भगवान आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग के मालिकाना हक, राग-भोग, पूजा-अर्चना और मंदिर पुनर्निर्माण की मांग को लेकर वाद दाखिल किया गया था। इसमें स्व. सोमनाथ व्यास, स्व. रामरंग शर्मा और स्व. हरिहर पांडेय वादी थे। आवेदिका अनुष्का तिवारी ने 2019 में विजय शंकर रस्तोगी की वाद मित्र के रूप में हुई नियुक्ति को चुनौती देते हुए जिला जज की अदालत में रिवीजन दाखिल किया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मूल वाद के तत्कालीन एकमात्र जीवित वादी स्व. हरिहर पांडेय के अधिवक्ता के प्रति विश्वास का लाभ उठाकर वाद मित्र की नियुक्ति हासिल की गई। मामले में विजय शंकर रस्तोगी की ओर से प्रार्थना पत्र पर आपत्ति दाखिल की गई। इसके जवाब में अनुष्का तिवारी की ओर से प्रति-आपत्ति दाखिल की गई। वहीं, अदालत ने अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी को डिले कंडोनेशन प्रार्थना पत्र और लिखित आपत्ति दाखिल करने का अवसर दिया है। अनुष्का तिवारी ने मामले को करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और भगवान के अधिकारों से जुड़ा बताते हुए शीघ्र निस्तारण की मांग की है।