बीएचयू अस्पताल में मेडिसिन विभाग की ओपीडी में मंगलवार को बंधक बनाए गए डॉ. धीरज किशोर के मामले की जांच तीन सदस्यीय कमेटी करेगी। इसमें प्रॉक्टोरियल बोर्ड के साथ ही आईएमएस के भी एक सदस्य शामिल हैं। वहीं, चीफ प्रॉक्टर प्रो. संदीप पोखरिया की तरफ से लंका थाने की पुलिस को शिकायती पत्र दिया गया है।
डॉ. धीरज किशोर ने बुधवार को बीएचयू परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि ओपीडी कॉम्प्लेक्स में 50 सुरक्षाकर्मी रहते हैं। कंट्रोल रूम भी बना है। इसके बाद भी सुरक्षाकर्मियों को उन्हें मुक्त कराने में 40 मिनट लग गए। 10 छात्रों ने बंधक बना रखा था।
डॉक्टर ने ठोस कार्रवाई न होने पर पुलिस के उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही है। वहीं, चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि डॉक्टर ने एक वीडियो दिया है। इसमें जो लोग दिख रहे हैं उसके आधार पर जांच की जा रही है। जो भी जिम्मेदार मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
डॉक्टर ने पिटाई का भी लगाया आरोप
कुलपति, चीफ प्रॉक्टर, चिकित्सा अधीक्षक से शिकायत में उन्होंने बताया कि छात्र उस कमरे में आ गए, जहां मैं गया। वहां भी जबरन देखने का दबाव बना रहे थे। डॉक्टर धीरज का कहना है कि अगर सुरक्षा कर्मी अपनी डयूटी पर मुस्तैद रहते तो शायद इस तरह की घटना नहीं होती है। बताया कि एक छात्र ने मारने के लिए हाथ भी उठाया। सुरक्षाकर्मी उन्हें बचाने तक नहीं आए।
छात्रों ने जताई नाराजगी, चीफ प्रॉक्टर से शिकायत, लंका थाने में दी तहरीर
बीएचयू अस्पताल के जनरल मेडिसिन विभाग में मंगलवार को विवाद के बीच छात्रों ने बुधवार को चीफ प्रॉक्टर से शिकायत के साथ ही लंका थाने में तहरीर दी है। शिकायत में छात्रों ने परिजन को दिखाने गए एक छात्र के साथ दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। छात्रों का कहना है दोपहर 1 बजे वह परिजन को लेकर मेडिसिन ओपीडी में गए। जहां टोकन डिस्प्ले पर क्रमांक 66 प्रदर्शित हो रहा था। छात्र का कहना है कि वह अपने परिजन को दिखाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत 66 नंबर पर ही कमरे के अंदर गया। वहां मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. धीरज किशोर ने छात्र के साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया और उसे बाहर जाने के लिए कहा।
छात्र के अनुसार, चिकित्सक ने अपनी तबीयत खराब होने की बात भी कही। इस दौरान छात्र ने चिकित्सक से उनका नाम पूछा और यह भी कहा कि यदि उनकी तबीयत खराब थी तो पहले ही अवकाश लिया जा सकता था। छात्रों ने डॉक्टर धीरज किशोर पर घटना का वीडियो वायरल करने का आरोप लगाते हुए पूरे प्रकरण की सीसीटीवी फुटेज से जांच की मांग की है। ओपीडी में एक बाहरी व्यक्ति जो कि न तो चिकित्सक था न अस्पताल का स्टाफ वो मरीजों को दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर का पता बता रहा था। उस व्यक्ति ने भी दुर्व्यवहार किया।