वैज्ञानिक पद्धति से जांच होगी तो साबित हो जाएगा कि ज्ञानवापी के वजूखाने में पुराना और खराब पड़ा फव्वारा है। वहां कोई शिवलिंग नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश की प्रति अभी नहीं मिली है। आदेश की प्रति मिलने पर उसका अध्ययन करेंगे। अदालत पर पूरा भरोसा है। हम अदालत के फैसले का सम्मान करते हैं।
ज्ञानवापी-मां श्रृंगार गौरी प्रकरण की एक अन्य वादिनी राखी सिंह के पैरोकार जितेंद्र सिंह विसेन ने कहा कि हमारी आपत्ति सिर्फ इस बात को लेकर थी कि शिवलिंग को क्षति नहीं पहुंचनी चाहिए। शिवलिंग को नुकसान पहुंचाए बगैर जांच हो तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। यह सर्वविदित है कि ज्ञानवापी में मिला शिवलिंग आदि विश्वेश्वर का है। उसकी प्राचीनता को लेकर हमें किसी भी तरह का संशय नहीं है।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाली महिलाएं
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वादिनी सीता साहू ने कहा कि जो सत्य है, वह सामने आए। यही महादेव से प्रार्थना है। वैज्ञानिक पद्धति से जांच होगी तो स्पष्ट हो जाएगा कि शिवलिंग कितना प्राचीन है। यह खुशी का दिन है। लक्ष्मी देवी ने कहा कि जहां धर्म होता है, वहीं विजय होती है। वैज्ञानिक पद्धति से जांच होगी तो सब साफ हो जाएगा। आदि विश्वेश्वर का स्वयंभू शिवलिंग अनादि काल से ज्ञानवापी में विद्यमान है।
रेखा पाठक ने कहा कि हमारी मेहनत रंग ला रही है। वैज्ञानिक पद्धति से जांच होगी तो दूध का दूध और पानी का पानी साफ हो जाएगा। अभी तो यह झांकी है। आगे बड़ी लड़ाई बाकी है। वहीं मंजू व्यास ने कहा कि ज्ञानवापी में कैद बाबा की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। आराध्य आदि विश्वेश्वर का मंदिर उजाड़ा गया, फिर जबरन मस्जिद बनाई गई थी।