सुनवाई के बाद आपत्ति को निरस्त कर दिया गया और निगरानी याचिका विचारार्थ स्वीकार कर ली गई। वर्ष 1991से लंबित इस मामले को अधीनस्थ न्यायालय के सुनवाई के अधिकार को चुनौती देते हुए दाखिल निगरानी याचिका में कहा गया है कि सुनवाई का अधिकार सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है।
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से भी निगरानी याचिका जिला जज की अदालत में लंबित है, जिसमें कहा गया है कि अधीनस्थ अदालत को सुनवाई का अधिकार न होकर सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड लखनऊ को है। अब इन दोनों निगरानी याचिकाओं की सुनवाई एकसाथ 12 नवंबर को होगी।
यह निगरानी याचिकाएं तब दाखिल की गई जब भगवान विश्वेश्वरनाथ की तरफ से कोर्ट द्वारा नियुक्त वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अधीनस्थ अदालत में वर्ष 1991 से लंबित इस मामले में ज्ञानवापी परिसर का पुरातात्विक सर्वेक्षण कराने के साथ ही पूजापाठ की अनुमति मांगी। अधीनस्थ न्यायालय ने सुनवाई शुरू कर दी, तब निगरानी याचिका सत्र अदालत में दाखिल की गई।