स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
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इसमें कहा गया है कि श्रृंगार गौरी प्रकरण में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के आदेश पर हुई कोर्ट कमीशन की कार्यवाही में मिले शिवलिंग की आकृति का विधिवत राग भोग, पूजन व आरती जिला प्रशासन की ओर से करना चाहिए। इसके लिए किसी सनातनी धर्म से जुड़े व्यक्ति को नियुक्त किया जाए।
उनका कहना है कि कानूनन देवता की परिस्थिति एक जीवित बच्चे के समान होती है, जिसे अन्न-जल आदि नहीं देना संविधान की धारा अनुच्छेद-21 के तहत दैहिक स्वतंत्रता के मूल अधिकार का उल्लंघन है। ऐसे में पूजा-पाठ की अनुमति दी जाए।
जिला जज की अदालत में ज्ञानवापी स्थित श्रृंगा गौरी मामले को सुनवाई योग्य करार दिए जाने के बाद बृहस्पतिवार को स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर के मूल वाद में पुरातात्विक सर्वेक्षण के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका को खारिज करने की मांग की गई। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की कोर्ट में विश्वनाथ मंदिर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने अंजुमन की ओर से पुरातात्विक सर्वेक्षण के आदेश के खिलाफ दाखिल निगरानी याचिका को रद्द करने का आवेदन दिया है। इस मामले में 10 अक्तूबर की तारीख नियत की गई है।
वाद मित्र ने ज्ञानवापी श्रृंगार गौरी मामले में 12 सितंबर को जिला अदालत के आदेश की प्रमाण प्रति दाखिल करते हुए कहा कि वक्फ संपत्ति के मामले को न्यायालय ने खारिज कर दिया था। इसी के तहत यह निगरानी याचिका भी खारिज किये जाने योग्य है। इस पर निगरानीकर्ता अंजुमन इंतजामिया की ओर से आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए समय की मांग की गई। जिस पर अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 अक्तूबर की तिथि नियत कर दी।
बता दें की निगरानी कर्ता अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की ओर से जुलाई 2021 में निगरानी याचिका दाखिल की गई थी। कहा गया था कि ज्ञानवापी मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। उसकी सुनवाई का अधिकार लखनऊ वक्फ बोर्ड को है, सिविल न्यायालय को नहीं। संवाद