ज्ञानवापी मस्जिद पर अखिलेश-ओवैसी के विवादित बयान मामले में अदालत ने मुकदमा सुनने योग्य है या नहीं इस पर लिखित तर्क प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अब मामले में अगली सुनवाई सात नवंबर को होगी। ज्ञानवापी मामले में दोनों नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
ज्ञानवापी परिसर स्थित वजूखाने में गंदगी करने और सपा प्रमुख अखिलेश यादव, एआईएमआईएएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर भड़काऊ बयान को लेकर दिए गए प्रार्थना पत्र पर मंगलवार को एसीजेएम पंचम एमपी-एमएलए की अदालत में सुनवाई हुई। इसमें अदालत ने मुकदमा सुनने योग्य है या नहीं इस पर लिखित तर्क प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। अब मामले में अगली सुनवाई सात नवंबर को होगी। ज्ञानवापी मामले में दोनों नेताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
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बता दें कि ज्ञानवापी परिसर में मिले शिवलिंग के पास गंदगी फैलाने और उस पर बयानबाजी कर धार्मिक भावना भड़काने, नारेबाजी के मामला सुनवाई योग्य है या नहीं इस पर 18 अक्तूबर को कोर्ट का आदेश आना था। इसमें अखिलेश यादव, सांसद अससुद्दीन ओवैसी समेत शहर काजी और मौलवी पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की गई है।
ये है पूरा मामला
वाराणसी के रामेश्वर निवासी अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय की ओर से दाखिल वाद में मुकदमा सुनने योग्य है या नहीं, इस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। उन्होंने ज्ञानवापी में वजू स्थल के पास मिले कथित शिवलिंग के पास गंदगी फैलाने और शिवलिंग को लेकर बयानबाजी कर धार्मिक भावना भड़काने, नारेबाजी के मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और एआईएमआईएम चीफ असुद्दीन ओवैसी समेत शहर काजी और मौलवी पर आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।