ऊपरी अदालत के आदेश पर पुन:स्पेशल सीजेएम शिखा यादव की अदालत में बहस हुई। अदालत ने बहस सुनकर आदेश के लिये 15 नवंबर की तारिख नियत की है। इसके पहले भी जुलाई माह में भी बहस हुई थी लेकिन स्पेशल सीजेएम उज्जवल उपाध्याय के स्थानान्तरण की वजह से बहस के बाद भी आदेश नहीं हो सका था।
ज्ञानवापी में मिली शिवलिंगनुमा आकृति को क्षतिग्रस्त करने के मामले मे अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथीमिकी दर्ज करने के वाद पर स्पेशल सीजेएम शिखा यादव की अदालत में सोमवार को बहस पूरी हो गई। अदालत ने इस मामले में 15 नवंबर की तिथि आदेश के लिए नियत की है।
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बजरडीहा भेलुपुर के विवेक सोनी व चितईपुर के जयध्वज श्रीवास्तव की तरफ से दाखिल 156(3) सीआरपीसी के प्रार्थना पत्र पर अधिवक्ता देशरत्न श्रीवास्तव व नित्यानन्द राय ने कोर्ट को बताया कि द्वादश ज्योतिर्लिंग में प्रमुख काशी विश्वनाथ मंदिर अनादि काल से काशी में स्थित है। ज्योतिर्लिंग को प्राण प्रतिष्ठा करने के उपरांत स्थापित किया गया था, जो जीवित स्वरूप है और उसको कभी नुकसान नहीं हुआ है बल्कि मात्र मंदिर के स्वरूप को क्षतिग्रस्त किया गया था, तथा मंदिर के मलबे से ही कथित मस्जिद के भवन का स्वरूप बनाया गया और हर स्थिति में ज्योतिर्लिंग अपने स्थान पर कायम रहा है।
कुछ अज्ञात लोगों ने जो औंरगजेब के धर्म के लोग के मानने वाले हैं, ज्योतिर्लिंग को कूप बनाकर ढकने के उपरांत एक पोखरी का निर्माण कर वजू का स्थान असंवैधानिक तरीके से बना दिया। काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग को नुकसान पहुंचाकर हिंदू भावना भड़काने, शिवलिंगनुमा आकृति के ऊपरी भाग में सीमेंटनुमा पदार्थ जमाकर और आकृति को ड्रिलिंग मशीन से छेदकर फब्बारा का रूप देने का प्रयास किया गया। जिससे हिंदू जनभावनाएं आहत हैं इस प्रकार हिंदू भावनाएं भड़काकर दूसरे समुदाय के अज्ञात लोगों द्वारा दंगा कराने का प्रयास किया गया है। घटना की सूचना 3 जनवरी 2023 को पुलिस को दी गई और कोई कार्रवाई नहीं हुई। निचली अदालत ने 156(3) प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया तब ऊपरी अदालत में रिविजन दाखिल हुआ।
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विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट द्वितीय अनुभव द्विवेदी की अदालत ने ज्ञानवापी मामले में दाण्डिक पुनरीक्षण याचिका स्वीकार कर निचली अदालत के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एफआईआर दर्ज करने के प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया गया था। ऊपरी अदालत के आदेश पर पुन:स्पेशल सीजेएम शिखा यादव की अदालत में बहस हुई। अदालत ने बहस सुनकर आदेश के लिये 15 नवंबर की तारिख नियत की है।
इसके पहले भी जुलाई माह में भी बहस हुई थी लेकिन स्पेशल सीजेएम उज्जवल उपाध्याय के स्थानान्तरण की वजह से बहस के बाद भी आदेश नहीं हो सका। इस अदालत ने भी अक्तूबर माह में बहस सुनकर आदेश के लिए तारीख लगाई थी लेकिन कुछ विधिक बिंदुओं पर आज पुन: सुनवाई हुई। अदालत को वादी मुकदमा के अधिवक्ताओं ने बताया कि पोषणीयता के बिन्दु पर ऊपरी अदालत ने तय कर दिया है कि प्रकरण सुनवाई योग्य है।