मामले में आदेश के लिए 21 अक्तूबर की तिथि अदालत ने तय की। 8 लोगों का आवेदन अनुपस्थित रहने के कारण पहले ही खारिज हो गया था। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बिना वादी पक्ष की सहमति के किसी को पक्षकार नहीं बनाया जा सकता।
बता दें कि श्रृंगार गौरी की नियमित पूजा करने की इजाजत देने के लिए जिन महिलाओं ने याचिका डाली थी, उन्होंने किसी को भी पक्षकार बनाने से इनकार कर दिया था। याचिका डालने वाली वादी महिलाएं सीता साहू, मंजू व्यास, रेखा पाठक और लक्ष्मी देवी ने कहा है कि उन्हें इस केस में किसी को भी पक्षकार बनाने की जरूरत नहीं है। मामले में सुनवाई के लिए वह पर्याप्त हैं।