हिंदू पक्ष ने दावा किया कि ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग है।
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करीब 15 दिन तक चलने वाले सर्वे से कई हकीकत सामने आ सकती है। पता चल सकता है कि शिवलिंग जैसी आकृति स्वयंभू है या कहीं और से लाकर उसकी प्राण प्रतिष्ठा की गई थी? विवादित स्थल की वास्तविकता क्या है? विवादित स्थल के नीचे जमीन में क्या सच दबा हुआ है? ज्ञानवापी में बने गुंबद कब बनाए गए? तीनों गुंबद कितने पुराने हैं?
- वैज्ञानिक जांच में देखा जाएगा कि क्या मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर की संरचना के ऊपर किया गया।
- पश्चिमी दीवार की उम्र और प्रकृति की जांच होगी।
- तीन गुंबदों के ठीक नीचे सर्वे। यदि आवश्यक हो तो खोदाई करें।
- सभी तहखानों की जांच व उसकी सच्चाई। यदि आवश्यक हो तो खोदाई करें।
- इमारत की दीवारों पर मौजूद कलाकृतियों की सूची बनेगी। कलाकृतियों की उम्र और प्रकृति का पता लगाया जाएगा।
- इमारत की उम्र, निर्माण की प्रकृति का पता भी लगाया जाएगा।
- इमारत के विभिन्न हिस्सों और संरचना के नीचे मौजूद ऐतिहासिक, धार्मिक महत्व की कलाकृतियों और अन्य वस्तुओं की जांच की भी जांच होगी।
टोपोग्राफी ग्रह विज्ञान की एक शाखा है। इसकी मदद से पृथ्वी या अन्य किसी ग्रह, उपग्रह या क्षुद्रग्रह की सतह के आकार व कलाकृतियों का अध्ययन किया जाता है। इसका नक्शों के निर्माण में स्थालाकृति का विशेष महत्व है।