दूसरे तहखाने की चाबी मसाजिद कमेटी और प्रशासन के पास रहती है। जो तीसरा तहखाना कहा जाता है, वह मां श्रृंगार गौरी मंदिर के पिछले हिस्से में इमारत के पश्चिमी भाग से थोड़ी दूर पर एक गेट है। वह गैलरीनुमा हिस्से में खुलकर सीढ़ी से ऊपर जाता है। ज्ञानवापी परिसर में एएसआई सर्वे से दुनिया के सामने सच सामने आएगा। बड़े विवाद के हल की उम्मीद भी बंधी है।
काशी विश्वनाथ मंदिर से सटा ज्ञानवापी मस्जिद।
- फोटो : अमर उजाला
अदालत के आदेश के मुताबिक इमारत में पाई जाने वाली सभी कलाकृतियों की एक सूची तैयार की जाएगी। उन कलाकृतियों की उम्र और प्रकृति का पता लगाई जाएगी। इमारत की आयु, निर्माण की प्रकृति का भी पता लगाया जाएगा। जीपीआर सर्वेक्षण के साथ ही जहां भी आवश्यक होगा, वहां उत्खनन किया जाएगा।
ज्ञानवापी परिसर की दीवार, छत सहित अन्य हिस्सों की अलग-अलग तकनीक व वैज्ञानिक तरीकों से जांच की जाएगी। रडार सर्वे की तकनीक के जरिये जमीन के नीचे तीन से चार मीटर का सर्वे किया जा सकता है। एएसआई के सामने रडार सर्वे के अलावा ट्रेंच लगाने का भी विकल्प है।
ज्ञानवापी परिसर से 50 मीटर की दूरी में भी ट्रेंच लगाकर सर्वे किया जा सकता है। इससे पता चलेगा कि यह परिसर कितने पहले आबाद हुआ होगा? कौन सी चीज सबसे पहले बनी होगी? इस दौरान मिलने वाले पत्थर के टुकड़े, अन्न के दाने, मूर्तियां, अभिलेख व हर छोटी से छोटी वस्तु भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। इससे इतिहास की जानकारी मिल जाएगी। एएसआई सापेक्ष और निरपेक्ष डेटिंग पद्धति के जरिये भी सर्वे कर सकता है।
अयोध्या विवाद के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई सर्वे का आदेश दिया था। एएसआई सर्वे की रिपोर्ट को अहम मानते हुए फैसला सुनाया था। हालांकि, ज्ञानवापी के अंदर शिवलिंग जैसी आकृति और वजूखाने का सर्वे नहीं हो सकेगा। शिवलिंग का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे कराने के हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।